केलो नदी को मिलेगी नई पहचान: ₹11 करोड़ से संवरेगी रायगढ़ की जीवनधारा, पर चुनौतियां भी कम नहीं!

रायगढ़ जिले की जीवनदायिनी केलो नदी अब एक नए रूप में सामने आने वाली है! छत्तीसगढ़ शासन ने केलो नदी के सौंदर्यीकरण और जल संवर्धन के लिए एक बड़ी पहल की है। रायगढ़ विकासखंड के नवापाली में एनीकट निर्माण के लिए 11 करोड़ 2 लाख 74 हजार रुपये की प्रभावशाली प्रशासकीय स्वीकृति दे दी गई है।
यह परियोजना सिर्फ नदी को सुंदर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे। यह एनीकट भू-जल स्तर को बढ़ाने, निस्तारी के लिए पानी उपलब्ध कराने और सबसे महत्वपूर्ण, 100 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएगा। किसानों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब खरीफ और रबी दोनों ही मौसमों में 50-50 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर संयंत्र और आधुनिक पाइपलाइन के जरिए सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था होगी।
उम्मीदें और संभावित चुनौतियाँ
राज्य शासन का यह दूरदर्शी निर्णय न केवल केलो नदी के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाएगा बल्कि स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए निरंतर जल उपलब्धता सुनिश्चित कर उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगा। यह कदम रायगढ़ क्षेत्र में कृषि उत्पादन और समग्र आर्थिक विकास को एक नई गति देगा, जिससे यह क्षेत्र और भी समृद्ध होगा।
हालांकि, किसी भी बड़ी परियोजना की तरह, इसके भी कुछ संभावित हानिकारक पहलू या चुनौतियाँ हो सकती हैं जिन पर ध्यान देना आवश्यक है। इन पर भी विचार करना जरूरी है:
- पर्यावरणीय प्रभाव: एनीकट निर्माण से नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आ सकता है, जिससे नदी के निचले हिस्सों में जल-जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने या गाद जमा होने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना एक चुनौती होगी।
- भू-अर्जन और विस्थापन: यदि निर्माण के लिए भू-अर्जन की आवश्यकता पड़ती है, तो इससे स्थानीय लोगों के विस्थापन और उन्हें उचित मुआवजा व पुनर्वास प्रदान करने की चुनौती सामने आ सकती है।
- लागत में वृद्धि और समय-सीमा: यद्यपि कार्य को स्वीकृत राशि और समयावधि के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, अक्सर ऐसी परियोजनाओं में लागत बढ़ने और समय-सीमा का उल्लंघन होने का जोखिम बना रहता है। इससे परियोजना का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।
- रखरखाव की चुनौती: एक बार निर्माण पूरा हो जाने के बाद, एनीकट और सिंचाई प्रणाली का उचित और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती होगी ताकि इसका दीर्घकालिक लाभ मिल सके।
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा और स्वीकृत राशि के भीतर ही पूरा किया जाए। पारदर्शिता, उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग और मितव्ययिता पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्य केवल बाधा-रहित भूमि पर हो और यदि भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ी, तो वह भी स्वीकृत बजट सीमा के भीतर ही किया जाएगा। समय पर काम पूरा न होने पर नियमानुसार जुर्माने का भी प्रावधान है।
इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करके ही यह परियोजना वास्तव में रायगढ़ के लिए एक मील का पत्थर साबित हो पाएगी।



