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World Cancer Day Special: ‘कैंसर के खिलाफ जंग में रायपुर के ‘क्षेत्रीय कैंसर संस्थान’ की नई मिसाल

कैंसर… यह सिर्फ एक मेडिकल रिपोर्ट नहीं, बल्कि एक इंसान के संघर्ष, धैर्य और उम्मीद की अनूठी कहानी है। इस साल विश्व कैंसर दिवस की थीम “United by Unique” हमें याद दिलाती है कि कैंसर का हर अनुभव अलग होता है। इसी सोच के साथ रायपुर का ‘क्षेत्रीय कैंसर संस्थान’ (पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय) अब सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि ‘व्यक्ति-केंद्रित’ (People-Centered) देखभाल के जरिए एक नई इबारत लिख रहा है।।                                                             आंकड़ों में बदलाव: बढ़ती जागरूकता और भरोसा:-बीते दो दशकों में संस्थान के प्रति जनता का विश्वास और मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हुई है:

  • नए मरीज: साल 2003 में जहाँ नए मरीजों की संख्या 1601 थी, वहीं 2025 में यह बढ़कर 3500 से 4000 तक पहुँच गई है।
  • फॉलोअप: पहले मात्र 3500 मरीज फॉलोअप के लिए आते थे, अब यह आंकड़ा ढाई से तीन लाख प्रतिवर्ष तक जा पहुँचा है।
    अत्याधुनिक तकनीक: अब कैंसर की ‘पिन-पॉइंट’ सिकाई
    पुराने दौर की तुलना में अब संस्थान हाई-टेक मशीनों से लैस है:
  • एडवांस सिकाई: संस्थान में अब IMRT, IGRT और VMAT जैसी तकनीकें उपलब्ध हैं, जिससे कैंसर की सिकाई एकदम सटीक (Pinpoint) होती है और शरीर के स्वस्थ हिस्सों को नुकसान नहीं पहुँचता।
  • ब्रैकीथेरेपी: छत्तीसगढ़ का यह एकमात्र संस्थान है जहाँ इंटरस्टियल इम्प्लांट के जरिए मुख, गले और पेनिल कैंसर का इलाज किया जा रहा है। सिकाई के मरीजों की संख्या 475 से बढ़कर अब 25,000 प्रतिवर्ष हो गई है।
    महंगा इलाज अब बिल्कुल मुफ्त
    गरीब हो या अमीर, संस्थान हर किसी के लिए उम्मीद की किरण है:
  • लाखों की दवाइयां: यहाँ कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी पूरी तरह निःशुल्क है। 2003 में मात्र 2055 मरीज कीमो लेते थे, आज यह संख्या 24,000 है।
  • कैंसर सर्जरी: साल भर में 500 से 700 निःशुल्क ऑपरेशन किए जाते हैं, जिनमें आधुनिक HIPAC और PIPAC जैसी सर्जरी भी शामिल हैं।
    बच्चों के लिए विशेष केयर और पैलिएटिव वार्ड
  • नन्हे योद्धाओं की जंग: साल 2018 से बच्चों के लिए अलग ओपीडी और वार्ड संचालित है, जहाँ 1000 से अधिक बच्चे लाभ ले चुके हैं। यहाँ बच्चों के इलाज के साथ उनकी डाइट और ग्रोथ का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
  • दर्द से राहत: अंतिम अवस्था के मरीजों के लिए 30 बेड का अलग पैलिएटिव वार्ड है, जहाँ मॉर्फिन जैसी दर्दनिवारक दवाओं की उपलब्धता 1300 से बढ़कर 20,000 टेबलेट तक पहुँच गई है।
    10 साल पहले vs आज: क्या बदला?
    संस्थान के विशेषज्ञों (डॉ. विवेक चौधरी और डॉ. संतोष सोनकर) के अनुसार:
  • HPV वैक्सीनेशन: 2015 में इसके बारे में कोई नहीं जानता था, आज यह सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।
  • पर्सनलाइज्ड मेडिसिन: अब ‘एक ही इलाज सब पर लागू’ नहीं होता, बल्कि जीनोमिक टेस्टिंग से मरीज के डीएनए के आधार पर सटीक इलाज होता है।
  • भ्रामक जानकारी से बचें: इंटरनेट के युग में जहाँ जागरूकता बढ़ी है, वहीं ‘घरेलू नुस्खों’ जैसी गलत जानकारी (Infodemic) का खतरा भी बढ़ा है। हमेशा विशेषज्ञों पर ही भरोसा करें।

आज का विशेष कार्यक्रम:
रायपुर के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में आज सुबह जागरूकता रैली और मैराथन का आयोजन किया गया। साथ ही, प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक निःशुल्क कैंसर जांच शिविर लगाया जा रहा है।

लेखक:
डॉ. प्रदीप चंद्राकर (प्रोफेसर, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान)
डॉ. मंजूला बेक (विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय कैंसर संस्थान)

कैंसर का मतलब जीवन का अंत नहीं है। सही समय पर पहचान और आधुनिक इलाज ही इसका सबसे बड़ा समाधान है। अपवाहों से बचें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।

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