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साइबर फ्रॉड हुआ है? 1930 पर कॉल के बाद ऐसे वापस मिलता है आपका पैसा!जानिए सारे उपाय।

साइबर ठगी आज के दौर का सबसे बड़ा खतरा है। लेकिन घबराएं नहीं! अगर आप भी किसी फ्रॉड का शिकार हुए हैं और आपने तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल किया है, तो जान लीजिए कि आपकी रकम को बचाने और वापस पाने की जंग शुरू हो चुकी है।
पैसा वापस मिलने की पूरी प्रक्रिया को समझना आपके लिए बेहद ज़रूरी है। यहाँ वह पूरा ‘गेमप्लान’ बताया गया है जिसके तहत सरकार और बैंक आपके पैसे को ‘फ्रीज’ करके वापस दिलाने का प्रयास करते हैं।
चरण 1: तुरंत शिकायत – पैसे बचाने का पहला कदम
चाहे फ्रॉड ₹100 का हो या ₹1 लाख का, आपका पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है तुरंत शिकायत दर्ज करना।

  • कॉल करें: सबसे पहले 1930 पर कॉल करें।
  • ऑनलाइन दर्ज करें: या फिर \rightarrow https://www.cybercrime.gov.in पर जाकर विस्तृत शिकायत दर्ज करें।
  • क्या दें विवरण? रकम, समय, किस बैंक/खाते से गई, अकाउंट नंबर, ट्रांजैक्शन ID, और फ्रॉड करने वाले का नंबर/लिंक—एक भी जानकारी न छोड़ें!
    👉 रोचक तथ्य: आपकी शिकायत दर्ज होते ही, NPCI (National Payments Corporation of India) और संबंधित बैंक को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। यह ठीक वैसे है जैसे किसी खतरे का ‘रेड फ्लैग’ जारी करना!
    चरण 2: ‘फ्रीज’ एक्शन: जहाँ गया, वहीं रुकेगा पैसा!
    आपकी शिकायत दर्ज होने के बाद सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई होती है:
  • खाता फ्रीज: जिस बैंक खाते में फ्रॉड की रकम ट्रांसफर हुई है, उस खाते को तुरंत ‘फ्रीज’ कर दिया जाता है!
  • उद्देश्य: इसका सीधा मकसद यह है कि ठग उस रकम को आगे किसी और खाते में ट्रांसफर न कर पाए। पैसा जहाँ है, वहीं रुक जाएगा।
    चरण 3: जाँच और सबूतों की माँग
    अब पुलिस और जाँच एजेंसियाँ एक्शन में आती हैं:
  • जाँच शुरू: साइबर थाना या स्थानीय पुलिस आपकी शिकायत के आधार पर औपचारिक जाँच शुरू करती है।
  • सबूत: आपको कॉल या ईमेल के जरिए अपने फ्रॉड के प्रूफ (जैसे स्क्रीनशॉट, बैंक SMS, रसीद) जमा करने के लिए कहा जा सकता है। इन्हें संभालकर रखें!
    चरण 4: पैसा मिलने का स्वर्णिम मौका
    अगर आपकी शिकायत तुरंत दर्ज हो गई थी, तो यह सबसे अच्छी स्थिति है!
  • फ्रीज खाते में राशि: यदि फ्रॉड की गई पूरी रकम या उसका कुछ हिस्सा फ्रीज किए गए खाते में पाया जाता है, तो आपका पैसा वापस मिलने का रास्ता खुल जाता है।
  • रिफंड प्रोसेस: बैंक अपनी आंतरिक जाँच (Internal Inquiry) पूरी करने के बाद राशि वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
  • समय सीमा: आमतौर पर इस प्रक्रिया में 7 से 30 दिन तक का समय लग सकता है।
    चरण 5: पुलिस की फाइनल रिपोर्ट और रिफंड
    बैंक चाहकर भी तुरंत पैसा नहीं दे सकता। इसके लिए कानूनी अनुमति आवश्यक है:
  • अंतिम अनुमति: बैंक को फ्रीज किया गया पैसा आपको लौटाने के लिए पुलिस या कोर्ट से अनुमति की आवश्यकता होती है।
  • रिफंड: एक बार जब पुलिस अपनी जाँच पूरी कर लेती है और बैंक को ‘पैसा रिलीज’ करने की अनुमति मिल जाती है, तो आपकी राशि आपके बैंक खाते में रिफंड कर दी जाती है।
    💡 ज़रूरी सुझाव: रकम वापसी को तेज़ करने के लिए
  • FIR ज़रूर लें: अगर अभी तक केवल कॉल किया है, तो तुरंत cybercrime.gov.in पर जाकर FIR या ऑनलाइन कंप्लेन नंबर (Acknowledgement Number) ज़रूर प्राप्त करें।
  • ट्रैक करते रहें: अपने Acknowledgement Number को संभाल कर रखें—यह आपकी शिकायत को ट्रैक करने का एकमात्र जरिया है।
  • Follow-up है जरूरी: 1930 कॉल सेंटर पर नियमित रूप से Follow-up करने से आपकी प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
    याद रखें: साइबर फ्रॉड में समय ही सबसे बड़ा हथियार है। जितनी जल्दी आप 1930 पर कॉल करेंगे, आपके पैसे को फ्रीज करने की संभावना उतनी ही अधिक होगी!
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