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रेलवे बजट 2026: छत्तीसगढ़ के लिए 24 गुना बढ़ा फंड, ₹7,470 करोड़ का बजट।

जब भी भारतीय रेलवे के सबसे फायदे वाले जोन की बात होती है, तो दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), बिलासपुर का नाम सबसे ऊपर चमकता है। देश के कोयले से लेकर लौह अयस्क तक, विकास का पहिया इसी जोन की पटरियों से होकर गुजरता है। बजट 2026-27 में एक बार फिर छत्तीसगढ़ के लिए खुशियों की रेल चली है, लेकिन सवाल वही है—क्या देश का सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला यह ‘कमाऊ पूत’ अपनी जरूरतों के हिसाब से सुविधाएं पा रहा है?

₹7,470 करोड़ का ‘ऐतिहासिक’ बूस्टर डोज
इस साल के बजट में छत्तीसगढ़ के लिए ₹7,470 करोड़ का प्रावधान किया गया है। अगर हम बीते दशकों से तुलना करें, तो यह आंकड़ा वाकई चौंकाने वाला है। 2009-14 के बीच जहां छत्तीसगढ़ को सालाना औसतन केवल ₹311 करोड़ मिलते थे, आज यह राशि 24 गुना बढ़ चुकी है।
बजट की बड़ी बातें:

  • प्रगति पर कार्य: वर्तमान में राज्य में ₹51,080 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
  • कनेक्टिविटी का जाल: लगभग 1,200 किमी नए रेल ट्रैक और शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में खड़ा कर रहा है।
  • बस्तर को सौगात: रावघाट-जगदलपुर रेल प्रोजेक्ट के जरिए अबूझमाड़ के जंगलों तक विकास की सीटी सुनाई देगी।
    बिलासपुर जोन: उम्मीदें और हकीकत
    बिलासपुर रेलवे स्टेशन को ₹435 करोड़ की लागत से ‘एयरपोर्ट’ जैसा भव्य लुक देने की तैयारी है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत यहां यात्रियों की क्षमता 65 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 80 हजार करने का लक्ष्य है।
    हालांकि, जनता के मन में एक टीस हमेशा रहती है—मालगाड़ियों (Freight) को प्राथमिकता देने के चक्कर में यात्री ट्रेनें अक्सर घंटों लेट रहती हैं या अचानक रद्द कर दी जाती हैं। इस बजट में परमलकसा-खरसिया कॉरिडोर और नए फ्रेट कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। यह कदम ‘कमाऊ पूत’ के लिए मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है क्योंकि अलग फ्रेट कॉरिडोर बनने से यात्री गाड़ियों के लिए ट्रैक खाली होंगे और ट्रेनों की संख्या लगभग दोगुनी हो सकेगी।
    विकास की पटरी पर दौड़ता छत्तीसगढ़
    यह कहना गलत नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ अब केवल ‘कोयला ढोने’ वाला राज्य नहीं रहा।
    बजट के आंकड़े शानदार हैं और विजन भी स्पष्ट है। अब चुनौती है इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की, ताकि बिलासपुर जोन का यात्री भी वही ‘वीआईपी’ महसूस कर सके जो वह रेलवे के खजाने में राजस्व भरकर करता है।
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