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रायगढ़ में औद्योगिक सुरक्षा से खिलवाड़ पर कड़ा प्रहार: 6 इकाइयों पर भारी अर्थदंड, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के सख्त तेवर

औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिकों के जीवन के प्रति लापरवाही बरतने वाली कंपनियों पर प्रशासन ने अपना हंटर चला दिया है। रायगढ़ जिले की छह बड़ी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और गंभीर अनियमितताओं के मामले में श्रम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिभोगियों (Occupiers) और प्रबंधकों पर भारी अर्थदंड लगाया है।

सुरक्षा में सेंध और कानूनी कार्रवाई
कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के कड़े निर्देशन में जिले के औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा सतत निगरानी की जा रही थी। हाल ही में हुई कुछ औद्योगिक दुर्घटनाओं के बाद जब विभाग ने गहन निरीक्षण किया, तो चौंकाने वाली खामियां उजागर हुईं। ‘कारखाना अधिनियम 1948’ और ‘छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली 1962’ जैसी कानूनी धाराओं की धज्जियां उड़ाने वाली इन कंपनियों के खिलाफ श्रम न्यायालय में प्रकरण दर्ज किए गए थे।
इन दिग्गजों पर गिरी गाज (अर्थदंड का विवरण)

  • जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (खरसिया रोड): स्लैग ग्राइंडिंग यूनिट में सुरक्षा चूक के चलते अधिभोगी सब्यसाची बन्योपाध्याय और प्रबंधक अमरेश पांडे पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
  • मेसर्स नलवा स्पेशल स्टील लिमिटेड (तराईमाल): यहाँ सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी महंगी पड़ी। अधिभोगी सरदार सिंह राठी और प्रबंधक रविन्द्र सिंह चौहान को 1.40 लाख रुपये के दंड से नवाजा गया।
  • मेसर्स सिंघल स्टील एंड पावर लिमिटेड (तराईमाल): इस इकाई पर दोहरी मार पड़ी है। भवन एवं सन्निर्माण अधिनियम के उल्लंघन में संचालक और ठेकेदार पर जुर्माना लगा, वहीं कारखाना अधिनियम के एक अन्य मामले में अधिभोगी विनय कुमार शर्मा और प्रबंधक जी.के. मिश्रा पर 2.80 लाख रुपये का बड़ा अर्थदंड लगाया गया।
  • मेसर्स एनआरव्हीएस स्टील्स (तराईमाल) एवं एन.आर. इस्पात (गौरमुड़ी): इन दोनों इकाइयों के प्रबंधकों (पवन अग्रवाल एवं मोहित कुमार मिश्रा) पर 1.60 – 1.60 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका गया है।
    विवेचना: मुनाफे की होड़ में नहीं दी जा सकती जान की बलि
    यह कार्रवाई केवल एक आर्थिक दंड नहीं, बल्कि उन उद्योगपतियों के लिए संदेश है जो उत्पादन और मुनाफे के चक्कर में श्रमिकों के जीवन को दांव पर लगा देते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘श्रमिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता’ है। दुर्घटना के बाद जागने के बजाय, निरीक्षण और वैधानिक कार्रवाई के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्य में किसी भी श्रमिक का खून कारखानों की मशीनों में न बहे।
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