
छत्तीसगढ़ का शांत माने जाने वाला रायगढ़ जिला रविवार को अचानक हिंसा की आग में झुलस उठा। तमनार क्षेत्र में कोयला खदान के विरोध में उठा जनाक्रोश देखते-ही-देखते इतना उग्र हो गया कि सड़क रणभूमि में तब्दील हो गई। हालात इतने बिगड़े कि कानून की रक्षा करने पहुँची महिला थाना प्रभारी (TI) को भी भीड़ के गुस्से का शिकार होना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हिंसक भीड़ में शामिल कुछ महिलाओं ने महिला TI को घेर लिया और लात-घूंसे बरसाए। यह दृश्य इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए असहाय नजर आए।
विरोध से हिंसा तक
जानकारी के मुताबिक, JPL कोयला खदान परियोजना के खिलाफ ग्रामीण लंबे समय से विरोध जता रहे थे। रविवार को यह विरोध अचानक भड़क उठा। पहले नारेबाजी हुई, फिर पथराव शुरू हुआ और उसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
उग्र भीड़ ने पुलिस वाहनों में आग लगा दी, सड़कों पर पथराव किया और अफरा-तफरी मच गई. जब वर्दी भी सुरक्षित नहीं
घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि भीड़ ने महिला TI को भी नहीं बख्शा। भीड़ में मौजूद महिलाओं द्वारा की गई मारपीट ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन को झकझोर दिया, बल्कि समाज के सामने कई सवाल भी खड़े कर दिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पुलिसकर्मी हालात को संभालने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, लेकिन गुस्से के आगे व्यवस्था कमजोर पड़ती दिखी।
喙 कई घायल, तनाव बरकरार
इस हिंसक झड़प में पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हुए हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
⚖️ सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या जनआंदोलन का रास्ता हिंसा हो सकता है?
क्या विरोध की आड़ में कानून हाथ में लेना जायज है?
और सबसे अहम — जब पुलिस भी सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या?
रायगढ़ की यह घटना सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था और संवाद की विफलता का आईना बनकर सामने आई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ता है।



