300 दिन की छुट्टी का पैसा नहीं मिला, SSP बिलासपुर को अवमानना नोटिस!
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में पेंशनभोगी अधिकारियों के साथ हो रहे अन्याय को गंभीरता से लिया है और बिलासपुर SSP को अवमानना नोटिस जारी किया है।

🟨 1. मामला क्या है?
👮♂️ कौन-कौन याचिकाकर्ता:
33 सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी — जिनमें ASI बैजनाथ राय, निरीक्षक रघुनंदन शर्मा, और हनुमान प्रसाद मिश्रा प्रमुख हैं।
📋 क्या है मांग:
इन्होंने कोर्ट से यह गुहार लगाई कि उन्हें भी मध्य प्रदेश के कर्मचारियों की तरह 300 दिनों के छुट्टी नगदीकरण (Leave Encashment) का लाभ मिलना चाहिए।
💡 विवाद की जड़:
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कर्मचारियों को पूर्ववर्ती राज्य के समान लाभ नहीं मिल रहे, जबकि सेवा शर्तें मिलती-जुलती हैं।
🟩 2. कोर्ट का आदेश (29 जनवरी 2025)
⚖️ स्पष्ट निर्देश:
बिलासपुर SSP को 90 दिन के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन का निराकरण कर राशि का भुगतान करने को कहा गया।
📚 संदर्भ:
सुप्रीम कोर्ट के फगुआ राम बनाम राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देकर यह आदेश पारित हुआ था।
📆 समयसीमा:
29 जनवरी से 90 दिन में कार्यवाही हो जानी थी — लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
🟥 3. आदेश की अवहेलना
🚫 क्या नहीं हुआ:
ना याचिकाकर्ताओं के प्रार्थना पत्रों पर कोई निर्णय हुआ, ना ही भुगतान किया गया।
📣 नतीजा:
नाराज़ सेवानिवृत्त कर्मियों ने फिर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
📉 सरकारी लापरवाही का उदाहरण:
न्यायिक आदेश की अनदेखी करना न केवल प्रशासनिक उदासीनता है, बल्कि न्याय प्रणाली के प्रति असम्मान भी।
🟦 4. हाईकोर्ट की कार्रवाई
📌 अदालत की प्रतिक्रिया:
कोर्ट ने माना कि SSP ने जानबूझकर आदेश की अवहेलना की है।
📨 जारी हुआ नोटिस:
प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला बनते हुए SSP को नोटिस भेजा गया और जवाब मांगा गया।
🧾 अब क्या होगा:
SSP को कोर्ट में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।
🟫 5. क्यों है ये मामला अहम?
💰 सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकार:
यह सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि उन लोगों के भविष्य से जुड़ा है जिन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा देश की सेवा में लगाया।
⚖️ न्यायपालिका की गंभीरता:
यह घटना दर्शाती है कि कोर्ट कर्मचारियों के हितों की अनदेखी सहन नहीं करेगा।
🚨 उदाहरण बनेगा यह मामला:
यदि SSP पर सख्ती होती है, तो यह संदेश जाएगा कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
📌 अब आगे क्या?
🔍 SSP से उम्मीद की जा रही है कि वे उचित उत्तर प्रस्तुत करें और कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करें।
❗ यदि उत्तर संतोषजनक नहीं होता, तो उनके विरुद्ध न्यायालय दंडात्मक कार्यवाही कर सकता है।