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शिक्षा के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन: 42 वर्षों की सेवा के बाद प्रधान पाठक श्री डमरूधर दास को मिली भावभीनी विदाई सह सम्मान(सारंगढ़)

कपरतुंगा/अमलीपाली: शिक्षा जगत में चार दशकों तक अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले प्रधान पाठक श्री डमरूधर दास की सेवानिवृत्ति पर (जवाहर नगर )संकुल केंद्र कपरतुंगा में एक ऐतिहासिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। 1983 से शुरू हुई उनकी यह यात्रा मात्र एक कार्यकाल नहीं, बल्कि समर्पण, अनुशासन और बदलाव की एक महागाथा रही है।

विभागीय अनुभव और प्रशासनिक कुशलता का संगम:-

श्री डमरूधर दास ने केवल एक शिक्षक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक कुशल प्रशासक के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने विभागीय आदेशों का पालन करते हुए वेतन केंद्र प्रभारी, मंडल संयोजक और मध्यान्ह भोजन निरीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

दिग्गज शिक्षाविदों और गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस विदाई समारोह की में जिले भर से आए शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल हुए:

  • पूर्व प्राचार्य: श्री चेतन सिंह पटेल एवं श्री ओमीन कुमार ठाकुर (पूर्व प्रधान पाठक)।
  • प्रशासनिक नेतृत्व: प्राचार्य श्री कुशाल चंद्र पटेल एवं रवि शंकर पटेल (पूर्व संकुल समन्वयक)।
  • संकुल समन्वयक: श्री कन्हैया लाल पटेल एवं श्री प्रताप सिदार।
  • वरिष्ठ शिक्षक: श्री बलवंत सिंह राठिया (पाठक), श्री मुरलीधर पटेल, श्री राजेंद्र कुमार यादव (शिक्षक)।
  • उच्च वर्ग शिक्षक: श्री परसराम पंकज।
    इसके साथ ही जिला स्तर से पधारे अनेक गणमान्य शिक्षकों और अतिथियों ने श्री दास के कार्यकाल की सराहना करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए।

गाँव की गलियों से लेकर परिवार के आँगन तक फैला सम्मान

समारोह का सबसे भावुक क्षण वह था जब ग्रामवासियों और उपस्थित शिक्षक शिक्षिकाओं ने श्री दास के परिवार के सदस्यों ने उन्हें तिलक लगाकर और पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया। ग्रामीणों ने कहा कि श्री दास ने 1983 के उस पुराने दौर से लेकर आज के आधुनिक समय तक बच्चों को केवल पढ़ाया ही नहीं, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कार देकर समाज के लिए तैयार किया। उन्होंने आश्रम शाला जवाहर नगर में 15 वर्षों तक सेवा दी है ।उनके परिवार के सदस्यों की आँखों में 42 वर्षों की इस बेदाग सेवा के लिए गर्व साफ झलक रहा था।

एक नजर में गौरवशाली कार्यकाल:

  • आयोजक: शिक्षक परिवार संकुल-कपरतुंगा/अमलीपाली।

    विदाई की यह बेला केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक कर्मयोगी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का माध्यम थी। श्री डमरूधर दास का अनुभव और उनकी कार्यशैली आने वाले युवा शिक्षकों के लिए हमेशा एक लाइटहाउस (मार्गदर्शक) का कार्य करेगी। पूरा क्षेत्र और शिक्षक समुदाय उनके स्वस्थ और सुखद सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामना करते हुवे कार्यक्रम का अंत करते हुवे विदाई दिए।
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