छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि: उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखे दुर्लभ ऊदबिलाव(विश्व ऊदबिलाव दिवस पर विशेष)

विश्व ऊदबिलाव दिवस (World Otter Day) के ठीक एक दिन पहले छत्तीसगढ़ के वन्यजीव इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जुड़ गया है। गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों को उत्साह से भर दिया है। इस सुरक्षित वन क्षेत्र में अत्यंत संवेदनशील और दुर्लभ जीव ऊदबिलाव (Otter) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है।
यह खोज इस बात का सीधा प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों के जल स्रोत आज भी पूरी तरह शुद्ध, सुरक्षित और प्राकृतिक रूप से समृद्ध हैं। आइए जानते हैं इस बड़ी सफलता की पूरी इनसाइड स्टोरी और क्यों यह खोज भारत के पर्यावरण मानचित्र पर छत्तीसगढ़ का कद बढ़ाती है।
कैसे मिली यह बड़ी सफलता? (संयुक्त प्रयासों का नतीजा)
यह ऐतिहासिक कामयाबी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि टीम वर्क का बेहतरीन नमूना है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने मिलकर एक विशेष शोध अभियान चलाया था।
गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ श्री वरुण जैन के नेतृत्व में जब टाइगर रिजर्व के संभावित जल स्रोतों के पास आधुनिक ‘कैमरा ट्रैप’ लगाए गए, तो उसमें ऊदबिलाव की बेहद स्पष्ट और खूबसूरत तस्वीरें कैद हुईं। इन तस्वीरों ने वैज्ञानिकों के दावों पर आधिकारिक मुहर लगा दी।
ऊदबिलाव: जल स्रोतों के ‘हेल्थ इंस्पेक्टर’
वन्यजीव विशेषज्ञ ऊदबिलाव को पानी का “जैव संकेतक” (Bio-indicator) मानते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो ऊदबिलाव केवल उसी पानी में रह सकता है जो पूरी तरह स्वच्छ हो, जहां प्रदूषण न हो और जहां मछलियों व अन्य जलीय जीवों की प्रचुरता हो।
विशेषज्ञों का मानना है: यदि किसी नदी या तालाब में ऊदबिलाव फल-फूल रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां का पूरा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इनका मिलना यह साबित करता है कि यहां का पर्यावरण आज भी इंसानी दखल और प्रदूषण से मुक्त है।
छत्तीसगढ़ का अनूठा रिकॉर्ड: भारत की तीनों प्रजातियां यहां मौजूद
पूरी दुनिया में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में केवल 3 प्रजातियां ही मिलती हैं:
- यूरेशियन ऊदबिलाव (Eurasian Otter)
- स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव (Smooth-coated Otter)
- एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव (Asian Small-clawed Otter)
छत्तीसगढ़ के लिए सबसे गौरव की बात यह है कि हमारे राज्य में इन तीनों ही प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है। यह विविधता देश के बहुत कम राज्यों में देखने को मिलती है।वर्ष 2021 से चल रहा है महा-अभियान
छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव के संरक्षण और उन पर रिसर्च का काम साल 2021 से लगातार जारी है। राज्य शासन के निर्देश पर छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा इस पर गहन अध्ययन कर रही है।
विज्ञान सभा की प्रमुख शोधकर्ता श्रीमती निधि सिंह के नेतृत्व में एक टीम ने कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग के जंगलों और नदियों का खाक छाना। कैमरा ट्रैप और मैदानी अध्ययनों के जरिए ऊदबिलाव के व्यवहार, उनके प्रजनन और रहने के तौर-तरीकों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर वन विभाग को सौंपी गई है, जिससे अब इनके संरक्षण की नई नीतियां बनाई जा रही हैं।संकट में है ‘पानी का यह राजा’
हर साल 27 मई को विश्व ऊदबिलाव दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे मुख्य वजह यह है कि मासूम दिखने वाला यह जीव आज इंसानी लालच के कारण खतरे में है। ऊदबिलाव को मुख्य रूप से इन खतरों का सामना करना पड़ रहा है:
- प्राकृतिक आवासों (नदियों-तालाबों) का सिकुड़ना।
- पानी में बढ़ता रासायनिक प्रदूषण और प्लास्टिक कचरा।
- जलवायु परिवर्तन और जंगलों की आग।
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इनकी खाल और अंगों के लिए अवैध शिकार व तस्करी।
बदल रही है सोच: ग्रामीणों और मछुआरों ने बढ़ाया हाथ
इस अभियान की सबसे खूबसूरत बात यह रही है कि वन विभाग और विज्ञान सभा ने सिर्फ जंगलों तक सीमित न रहकर स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाया।
इसका असर यह हुआ है कि जो स्थानीय मछुआरे कभी ऊदबिलाव को मछली पकड़ने में बाधा मानते थे, आज वे इसके सबसे बड़े रक्षक बन गए हैं। अब यदि किसी ग्रामीण को ऊदबिलाव संकट में दिखता है, तो वे उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय खुद वन विभाग को रेस्क्यू के लिए सूचना दे रहे हैं।वन विभाग की अपील: एक कदम हमारा, एक कदम आपका
इस बड़ी उपलब्धि पर वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने प्रदेश के नागरिकों से एक भावुक और जिम्मेदार अपील की है:
- जब भी आप किसी प्राकृतिक जल स्रोत, नदी या पिकनिक स्पॉट पर जाएं, तो वहां प्लास्टिक, कांच या कोई भी कचरा न फेंकें।
- पानी को प्रदूषित होने से बचाएं, क्योंकि यह इन बेजुबान जीवों का इकलौता घर है।
- यदि गर्मियों के दिनों में जंगल में कहीं भी आग दिखने की सूचना मिले, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
याद रखें: ऊदबिलाव जैसी दुर्लभ प्रजातियों को बचाना केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक समुदाय और हम सब मिलकर आगे नहीं आएंगे, तब तक प्रकृति का यह अनमोल ताना-बाना सुरक्षित नहीं रह सकता। आइए, इस विश्व ऊदबिलाव दिवस पर संकल्प लें कि हम अपने जल स्रोतों को स्वच्छ रखेंगे!




