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रायपुर में नाबालिगों की ड्राइविंग पर ‘फुल स्टॉप’: पदभार संभालते ही एक्शन में DCP डॉ. अर्चना झा, पैरेंट्स को दी ये बड़ी चेतावनी

रायपुर में ट्रैफिक डीसीपी डॉ. अर्चना झा ने एक बेहद जरूरी और कड़ा कदम उठाया है। शहर के करीब 70 स्कूलों के प्रिंसिपल्स के साथ हुई इस हाई-लेवल मीटिंग का सीधा संदेश है: अब सड़कों पर नाबालिगों की मनमानी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अगर आपका बच्चा भी अंडरएज (18 साल से कम) है और बिना गियर या गियर वाली स्कूटी-बाइक लेकर स्कूल या ट्यूशन जाता है, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी है।

‘कूल’ नहीं, जानलेवा है नाबालिगों का ड्राइविंग शौक

आजकल सड़कों पर रील बनाने या दोस्तों के बीच ‘कूल’ दिखने के चक्कर में नाबालिगों द्वारा फर्राटा भरने का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। बिना ड्राइविंग लाइसेंस, बिना सही ट्रेनिंग और ट्रैफिक नियमों की समझ न होने के कारण आए दिन दिल दहला देने वाले हादसे हो रहे हैं।
अक्सर अखबारों में ऐसी खबरें सुर्खियां बनती हैं जहां किसी 15-16 साल के मासूम की तेज रफ्तार बाइक डिवाइडर से टकरा गई, या किसी राहगीर को अपनी चपेट में ले लिया। ऐसी दुर्घटनाएं न सिर्फ उस बच्चे की जिंदगी तबाह करती हैं, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों को कभी न भूलने वाला गम दे जाती हैं। रायपुर पुलिस अब इसी जानलेवा ट्रेंड पर पूरी तरह लगाम लगाने के मूड में है।

₹25,000 का जुर्माना और जेल: पेरेंट्स ध्यान दें!

अगर आपको लगता है कि बच्चा पकड़ा गया तो सिर्फ ‘सॉरी’ बोलने या छोटा-मोटा चालान भरने से काम चल जाएगा, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अब नियम बेहद सख्त हैं:

  • भारी-भरकम जुर्माना: नाबालिग के गाड़ी चलाते पकड़े जाने पर वाहन मालिक या माता-पिता पर ₹25,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • जेल की सजा: सिर्फ जुर्माना ही नहीं, बल्कि 6 महीने तक की जेल का भी प्रावधान है।
  • गाड़ी का रजिस्ट्रेशन: जिस वाहन को नाबालिग चला रहा था, उसका रजिस्ट्रेशन भी रद्द किया जा सकता है।
  • बच्चे के भविष्य पर असर: दोषी नाबालिग का 25 साल की उम्र तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बन पाएगा।

स्कूल बसों के लिए भी ‘कड़े निर्देश’

डीसीपी डॉ. अर्चना झा ने सिर्फ बच्चों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें स्कूल लाने-ले जाने वाली बसों पर भी शिकंजा कसा है। बैठक में साफ कहा गया है कि स्कूल बसों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का 100% पालन होना अनिवार्य है।

  • हर स्कूल बस का महीने में कम से कम एक बार मैकेनिकल इंस्पेक्शन (तकनीकी जांच) होगा।
  • चालकों (ड्राइवर्स) और परिचालकों (कंडक्टर्स) का नियमित रूप से आई-टेस्ट (नेत्र परीक्षण) और हेल्थ चेकअप कराया जाएगा ताकि तकनीकी या शारीरिक खराबी के कारण कोई हादसा न हो।

पुलिस, स्कूल और पेरेंट्स: सबकी सामूहिक जिम्मेदारी

यातायात पुलिस कमिश्नरेट रायपुर की इस मुहिम में स्कूलों को भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब हर स्कूल में होने वाली पेरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) में माता-पिता को इस कानून के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही, प्रार्थना सभा या क्लास रूम में बच्चों को सड़क सुरक्षा से जुड़े अवेयरनेस वीडियो दिखाए जाएंगे ताकि वे खुद अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर हों।
एक सजग नागरिक और जिम्मेदार माता-पिता होने के नाते हमारा भी यह कर्तव्य है: बच्चों को उम्र से पहले गाड़ी की चाबी सौंपकर उनके हाथ में ‘मौत का परवाना’ न दें। उन्हें समझाएं कि जिंदगी रफ्तार से कहीं ज्यादा कीमती है। रायपुर पुलिस के इस सख्त और सराहनीय कदम का स्वागत कीजिए और अपने बच्चों को सुरक्षित रखिए।

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