एनडीपीएस मामलों में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त: गवाह पेश न करने पर पुलिसकर्मियों का रुकेगा वेतन, डीजीपी को कड़ा संदेश

आपराधिक मुकदमों में पुलिस विभाग की ढिलाई और गवाहों के समय पर कोर्ट न पहुंचने को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि एनडीपीएस (नशीली दवाओं की तस्करी) जैसे गंभीर मामलों में पुलिस गवाहों को पेश करने में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाल ही में मादक सिरप की तस्करी से जुड़े एक गंभीर मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि तय तारीख पर अभियोजन पक्ष और पुलिस गवाह अदालत में हाजिर नहीं होते हैं, तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों का वेतन (सैलरी) तुरंत रोक दिया जाए।
किस मामले में कोर्ट ने लिया यह एक्शन?
यह पूरा मामला नेहल सिंह बनाम छत्तीसगढ़ राज्य के तहत प्रतिबंधित नशीली दवाओं (मादक सिरप) की अवैध बिक्री और तस्करी के एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा है। जिसमें आवेदक के तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता फौजिया मिर्जा तथा प्रतिवादी अधिवक्ता स्मृति श्रीवास्तव(राज्य) मौजूद रही।
पुलिस ने एक अस्पताल के पास से दो आरोपियों को ई-रिक्शा में 40 बोतलें (4 लीटर) कोडीन फॉस्फेट युक्त मादक सिरप के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ कि आरोपी यह प्रतिबंधित सिरप अन्य आपूर्तिकर्ताओं (सप्लायर्स) से खरीदकर आगे बेचते थे, जिसके बाद पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और निर्देश:
- मुकदमों में हो रही अनावश्यक देरी: हाईकोर्ट ने पाया कि इस ड्रग्स केस में आरोप तय होने के बाद भी मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा था। वजह यह थी कि महत्वपूर्ण गवाहों और पुलिसकर्मियों को भेजे गए समन बार-बार बिना तामील हुए (unserved) वापस आ रहे थे। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की इस लापरवाही के कारण आपराधिक मुकदमे लंबे समय तक खिंच रहे हैं।
- वेतन रोकने की सख्त चेतावनी: कोर्ट ने डीजीपी को निर्देशित किया है कि वे इस केस से जुड़े सभी गवाहों, जिनमें जब्ती की कार्रवाई के स्वतंत्र गवाह और पुलिसकर्मी शामिल हैं, की उपस्थिति 3 जुलाई 2026 की सुनवाई पर हर हाल में सुनिश्चित कराएं। ऐसा न होने पर संबंधित जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की सैलरी रोकने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
- भविष्य के लिए कड़ा संदेश: हालांकि यह आदेश इसी विशिष्ट मामले के संदर्भ में आया है, लेकिन इसके जरिए हाईकोर्ट ने पूरे पुलिस महकमे को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दे दिया है। कोर्ट के इस कड़े रुख से साफ है कि भविष्य में भी अगर किसी एनडीपीएस या अन्य गंभीर मामलों में ऐसी लापरवाही पाई गई, तो पुलिसकर्मियों के खिलाफ वेतन रोकने जैसी दंडात्मक कार्यवाही दोबारा की जा सकती है।
अदालत के इस फैसले के बाद अब पुलिस विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा ताकि मुकदमों का निपटारा तेजी से किया जा सके और अपराधियों को समय पर सजा मिल सके।




