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नकटी आंदोलन: चार जिलों से बुलाई गई भारी पुलिस फोर्स, ‘विधायक कॉलोनी’ के विरोध में ग्रामीणों का रतजगा


राजधानी रायपुर के माना इलाके में स्थित ग्राम नकटी इन दिनों एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया है. गांव में प्रस्तावित ‘विधायक कॉलोनी’ के निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा की जा रही बेदखली की कार्रवाई का स्थानीय ग्रामीण कड़ा विरोध कर रहे हैं. जमीन बचाने के लिए ग्रामीणों का आंदोलन इस कदर तेज हो चुका है कि वे पिछले एक सप्ताह से रात-रात भर जागकर (रतजगा) पहरा दे रहे हैं. दूसरी ओर, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भी कमर कस ली है और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ नकटी ग्राम

क्या है पूरा मामला?

शासन की योजना के तहत रायपुर के ग्राम नकटी में विधायकों के आवास के लिए एक नई कॉलोनी प्रस्तावित की गई है. इस परियोजना के लिए चिन्हित भूमि पर रह रहे परिवारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सरकारी है और वहां से अतिक्रमण हटाया जाना वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है. इसके तहत राजस्व विभाग ने वार्ड नंबर 16 और 17 के करीब 48 घरों को खाली कराने के लिए बेदखली का नोटिस चस्पा किया था.
इसके विपरीत, स्थानीय निवासियों का दावा है कि अचानक इस तरह बेदखल किए जाने से उनके सामने सिर छुपाने का संकट खड़ा हो जाएगा. इसी मांग को लेकर ग्रामीणों ने ‘जबर भुइया बचाव आंदोलन’ की शुरुआत की है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष लाठियां लेकर अपनी जमीनों की सुरक्षा के लिए डटे हुए हैं.

चार जिलों से बुलाई गई फोर्स, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

बीते 26 जून को जब राजस्व विभाग की टीम कब्जा हटाने पहुंची थी, तब स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी. इसके बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए रायपुर पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है.
आधिकारिक आदेश के अनुसार, 29 और 30 जून को प्रस्तावित कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं:

  • इस पूरे सुरक्षा अमले की कमान रायपुर ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक (SP) श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को सौंपी गई है.
  • स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल रायपुर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी जिलों—बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद से भी अतिरिक्त पुलिस बल, उप पुलिस अधीक्षक (DSP), निरीक्षक और दंगा रोधी दस्ता (बलवा ड्रिल सामग्री के साथ) रायपुर बुलाया गया है.
  • वर्तमान में 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम गांव और उसके आसपास मुस्तैद है.

मध्यस्थता की कोशिशें बेनतीजा

नया रायपुर और प्रभावित क्षेत्र में हलचल बेहद तेज है. मामले को सुलझाने और किसी बीच के रास्ते पर पहुंचने के लिए वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के स्तर पर भी प्रयास किए जा रहे हैं. संसद सदस्य बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों और रायपुर जिला प्रशासन के बीच मध्यस्थ बनकर बैठकें भी ली हैं, ताकि कोई शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके. हालांकि, इन बैठकों के बाद भी अब तक कोई ठोस या सर्वसम्मत परिणाम सामने नहीं आ सका है और गतिरोध बरकरार है.

वर्तमान स्थिति

फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है. एक तरफ जहां प्रशासन नियमों के तहत अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए कटिबद्ध नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. दोनों पक्षों के अपने-अतने तर्क हैं—प्रशासन जहां विकास योजना और शासकीय भूमि का हवाला दे रहा है, वहीं ग्रामीण इसे अपने आशियाने और अस्तित्व की लड़ाई मान रहे हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बातचीत के जरिए इसका कोई शांतिपूर्ण समाधान निकलता है या प्रशासन बलपूर्वक कार्यवाही की ओर आगे बढ़ता है.

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