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कलम और किताबों से संवरता बचपन: युवा सूत सारथी समाज की एक सराहनीय पहल

बिलासपुर के इमलीभाठा अम्बेडकर आवास में हाल ही में उम्मीद और बदलाव की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। समाज के विकास और उत्थान के लिए सबसे जरूरी माध्यम ‘शिक्षा’ को आधार बनाकर युवा सूत सारथी समाज के युवाओं ने एक सराहनीय कदम उठाया है। समाज के अध्ययनरत बच्चों को संबल देने के लिए आयोजित इस शिक्षा अभियान के तहत निःशुल्क कॉपी, किताब, पेंसिल और अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्रियां बांटी गईं। यह सिर्फ किताबों का वितरण नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को पंख देने की एक गंभीर कोशिश है।
इस आत्मीय आयोजन में बच्चों को केवल पाठ्य सामग्री ही नहीं सौंपी गई, बल्कि उन्हें जीवन की अमूल्य सीख भी दी गई। युवाओं ने बच्चों के साथ वक्त बिताते हुए उन्हें नियमित रूप से पढ़ाई करने, अच्छे संस्कारों को आत्मसात करने और अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए जी-जान से मेहनत करने की प्रेरणा दी। बच्चों की खिलखिलाहट और उनके चेहरों की चमक यह साफ बयां कर रही थी कि जब सही समय पर सही मार्गदर्शन मिले, तो हौसलों को एक नई उड़ान मिलती है।
इस पहल की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका निरंतर बने रहने का संकल्प है। युवा सूत सारथी समाज के सजग युवाओं ने यह बीड़ा उठाया है कि भविष्य में भी किसी भी जरूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में वे कभी कोई बाधा नहीं आने देंगे और हर संभव सहयोग का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।
आज के दौर में जब समाज को सही दिशा देने की जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है, तब सूत सारथी समाज की यह पहल वाकई अनुकरणीय और प्रेरणास्पद है। यह कदम न सिर्फ शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा। सच ही कहा गया है— **”पढ़ेगा समाज, तभी तो बढ़ेगा समाज।”** युवाओं का यह जज्बा इस बात का गवाह है कि जब युवा सोच एकजुट होती है, तो एक बेहतर और शिक्षित कल का निर्माण तय है।


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