
हाइलाइट्स:
- मामला: रायपुर के पुरानी बस्ती थाने का, सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री और मोबाइल नंबर प्रसारित करने का आरोप।
- सजा: विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने आरोपी को सुनाई 3 साल के सश्रम कारावास की सजा।
- राहत: पीड़िता को ‘महिला पीड़ित प्रतिकर योजना’ के तहत मिलेगा 1 लाख रुपये का मुआवजा।
रायपुर। सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल और किसी मासूम को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रताड़ित करना एक युवा को बेहद महंगा पड़ गया है। रायपुर के विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने एक गंभीर मामले में त्वरित और कड़ा फैसला सुनाते हुए 19 वर्षीय आरोपी को 3 साल के सश्रम कारावास (कठोर जेल) की सजा सुनाई है। पुलिस की मजबूत पैरवी और तकनीकी साक्ष्यों के दम पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला रायपुर के पुरानी बस्ती थाने का है (अपराध क्रमांक 151/2025)। आरोपी रूपेश यादव (उम्र 19 वर्ष), जो कि कुशालपुर, पुरानी बस्ती का निवासी है, ने एक नाबालिग पीड़िता की फोटो और उसका मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था। आरोपी ने न सिर्फ पीड़िता की पहचान उजागर की, बल्कि उसके खिलाफ अश्लील और लैंगिक उत्पीड़न से जुड़ी सामग्री भी प्रसारित की, जिससे पीड़िता को भारी मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
पुलिस की पुख्ता जांच ने नहीं छोड़ा बचने का रास्ता
शिकायत मिलते ही पुरानी बस्ती पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। डीसीपी (पश्चिम जोन) के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने इस साइबर अपराध के खिलाफ कड़े कदम उठाए:
- तकनीकी साक्ष्य: पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से डिजिटल फुटप्रिंट्स और तकनीकी डेटा जुटाया।
- दस्तावेजी प्रमाण: स्क्रीनशॉट्स और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को कानूनी रूप से संकलित किया गया।
- ठोस चार्जशीट: पुलिस ने अदालत के सामने इतनी सशक्त विवेचना पेश की कि आरोपी का बचना नामुमकिन हो गया।
कानून का चला चाबुक: जेल और जुर्माना दोनों
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी रूपेश यादव को भारतीय न्याय संहिता की धारा 79, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 और पॉक्सो एक्ट की धारा 12 एवं 15 के तहत दोषी पाया।
विचारण के बाद, माननीय विशेष न्यायालय (पॉक्सो), रायपुर ने आरोपी को 03 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा से दंडित किया।
पीड़िता को न्याय और आर्थिक संबल
न्यायालय ने सिर्फ अपराधी को सजा ही नहीं दी, बल्कि पीड़िता के दर्द को समझते हुए एक बड़ा आदेश भी जारी किया। कोर्ट ने ‘महिला पीड़ित प्रतिकर योजना’ के अंतर्गत पीड़िता को ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) की आर्थिक सहायता (प्रतिकर राशि) प्रदान करने के आदेश पारित किए हैं।
यह फैसला उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो सोशल मीडिया को केवल मनोरंजन या किसी को बदनाम करने का जरिया समझते हैं। इंटरनेट पर की गई एक छोटी सी गलती भी आपको सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकती है। डिजिटल युग में सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और दूसरों के सम्मान का ध्यान रखें।




