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नशा तस्कर मुकेश बनिया के साम्राज्य पर ‘सफेमा’ का हथौड़ा, ₹42 लाख की संपत्ति फ्रीज(रायपुर)

नशा तस्कर मुकेश बनिया

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने शहर के बड़े नशा तस्कर मुकेश उर्फ “मुकेश बनिया” के खिलाफ एक और बड़ी और निर्णायक कानूनी कार्रवाई की है। पुलिस ने सिर्फ आरोपी को जेल की सलाखों के पीछे ही नहीं भेजा, बल्कि उसके पूरे आर्थिक साम्राज्य को हिलाकर रख दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) की कमाई से खड़ी की गई उसकी करीब ₹42 लाख की संपत्तियों को SAFEMA (सफेमा) सक्षम प्राधिकारी, मुंबई द्वारा पूरी तरह फ्रीज (अटैच) कर दिया गया है।
सेंट्रल ज़ोन के डीसीपी आइपीएस उमेश प्रसाद गुप्ता और एडिशनल डीसीपी तारकेश्वर पटेल के मार्गदर्शन में हुई यह कार्यवाही यह साफ संदेश देती है कि पुलिस अब सिर्फ नशा तस्करों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी रीढ़ की हड्डी यानी उनके आर्थिक नेटवर्क को भी पूरी तरह नेस्तनाबूद कर रही है। रवि साहू के बाद मुकेश बनिया दूसरा ऐसा बड़ा तस्कर है जिस पर रायपुर पुलिस ने यह तगड़ा आर्थिक प्रहार किया है।

31 मुकदमों का इतिहास और हाईटेक ‘गांजा हाइडआउट’

मुकेश बनिया कोई छोटा-मोटा अपराधी नहीं है, बल्कि रायपुर शहर में नशे के काले कारोबार का एक बड़ा और शातिर चेहरा है। उसके अपराधों का ब्योरा उसकी गंभीर पृष्ठभूमि को दर्शाता है:

  • आपराधिक रिकॉर्ड: मुकेश के खिलाफ पहले से ही हत्या, बलवा, मारपीट, गुंडागर्दी, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 31 गंभीर मामले दर्ज हैं।
  • हाईटेक नेटवर्क: इससे पहले पुलिस ने उसके एक बेहद आधुनिक और तकनीकी रूप से सुरक्षित ‘गांजा हाइडआउट’ (गुप्त ठिकाने) का भी पर्दाफाश किया था, जहां से वह पूरा नेटवर्क चलाता था।
  • हालिया गिरफ्तारी: इसी साल 26 फरवरी 2026 को सिटी कोतवाली और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट ने एक संयुक्त ऑपरेशन में उसे दबोचा था। तब उसके पास से 6.119 किलो गांजा, एक अवैध देसी कट्टा, तीन कारतूस और 2400 नशीली गोलियां (अल्प्राजोलम) बरामद हुई थीं।

आखिर क्या है SAFEMA और कैसे कसा कानूनी शिकंजा?

लगातार अपराधों के कारण मुकेश बनिया के खिलाफ पहले ही PIT-NDPS एक्ट, 1988 के तहत डिटेंशन ऑर्डर (नजरबंदी आदेश) जारी किया जा चुका था। लेकिन पुलिस इसके आगे गई और उसकी अवैध कमाई का पता लगाने के लिए एक विस्तृत वित्तीय जांच (Financial Investigation) शुरू की।

क्या होती है फ्रीजिंग की कार्रवाई?
जांच में सामने आया कि मुकेश का एक आलीशान आवासीय मकान और तीन गाड़ियां ड्रग्स की काली कमाई से खरीदी गई थीं। सिटी कोतवाली पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 68-F(1) के तहत इन ₹42 लाख की संपत्तियों को फ्रीज करने का प्रस्ताव मुंबई भेजा था, जिसे सक्षम प्राधिकारी ने अब पूरी तरह कन्फर्म (स्वीकार) कर दिया है।

इस आदेश के बाद अब मुकेश या उससे जुड़ा कोई भी व्यक्ति इन संपत्तियों को न तो बेच सकता है, न ही गिरवी रख सकता है और न ही किसी को ट्रांसफर कर सकता है।

अब आगे क्या होगा?

कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, अब संबंधित पक्षों (मुकेश और उसके परिजनों) को सक्षम प्राधिकारी के सामने यह साबित करना होगा कि यह मकान और गाड़ियां उन्होंने ईमानदारी की कमाई से खरीदे हैं। अगर वे अपनी आय का वैध स्रोत (Valid Source of Income) नहीं दिखा पाते हैं, तो इन संपत्तियों को हमेशा के लिए सरकारी खजाने में जब्त (Forfeiture) कर लिया जाएगा।
इस पूरी बड़ी कामयाबी के पीछे एसीपी कोतवाली दीपक मिश्रा के सुपरविजन में निरीक्षक सतीश सिंह गहरवार की मुख्य भूमिका रही, जिन्होंने राजस्व और परिवहन विभाग के चक्कर काटकर सारे दस्तावेज जुटाए और मुंबई अथॉरिटी के साथ सटीक तालमेल बिठाकर इस फ्रीजिंग ऑर्डर को मुकाम तक पहुंचाया।
रायपुर पुलिस कमिश्नरेट का यह कदम साफ करता है कि शहर को नशामुक्त बनाने के लिए अब तस्करों की कमर आर्थिक रूप से तोड़ी जा रही है ताकि वे दोबारा पैर न पसार सकें।

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