E20 पेट्रोल से खराब हुवा नया वाहन तो कंपनी देगी नया वाहन या पूरे पैसे वापस! छत्तीसगढ़ उपभोक्ता फोरम का देश में पहला और ऐतिहासिक फैसला

क्या आपकी गाड़ी भी नए एथेनॉल वाले E20 पेट्रोल से चलती है? क्या आपको भी डर सताता है कि कहीं इस नए ईंधन से आपकी गाड़ी का इंजन खराब न हो जाए?
अगर हाँ, तो छत्तीसगढ़ से आई यह खबर आपके सारे डर दूर कर देगी और देश के करोड़ों वाहन मालिकों को बड़ी राहत देगी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने देश की बड़ी कार कंपनियों के होश उड़ा दिए हैं।
आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और कैसे यह फैसला देश का सबसे अनोखा और पहला बड़ा केस बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक उपभोक्ता ने बड़े चाव से E20 पेट्रोल सपोर्ट करने वाली एक नई ब्रांडेड कार खरीदी थी। कंपनी का दावा था कि यह गाड़ी पर्यावरण के अनुकूल एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल से चलने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
लेकिन गाड़ी में जैसे ही E20 पेट्रोल का इस्तेमाल किया गया, कुछ ही समय में गाड़ी का इंजन और अन्य हिस्से खराब हो गए। जब कंपनी ने इस पर कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया, तो परेशान ग्राहक ने रायपुर उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।
उपभोक्ता आयोग का जोरदार और ऐतिहासिक फैसला
इस मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने एक ऐसा फैसला सुनाया, जो देश के इतिहास में नजीर बन गया है।
फोरम ने सीधे तौर पर कार कंपनी और डीलर को दोषी माना और आदेश दिया:
- नई कार देनी होगी: कंपनी तुरंत ग्राहक को उसी मॉडल की बिल्कुल नई E20 सपोर्टेड कार दे।
- या फिर 20.5 लाख रुपये वापस करे: अगर कंपनी नई कार नहीं दे सकती, तो उसे गाड़ी की पूरी कीमत, आरटीओ चार्ज और इंश्योरेंस मिलाकर कुल 20 लाख 50 हजार 494 रुपये ग्राहक को वापस लौटाने होंगे।
- 7% ब्याज भी देना होगा: यदि कंपनी 45 दिनों के भीतर इस आदेश का पालन नहीं करती है, तो उसे इस पूरी रकम पर 7% सालाना ब्याज भी देना होगा।
आखिर यह फैसला इतना बड़ा और महत्वपूर्ण क्यों है?
भारत सरकार और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी देश में प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात को घटाने के लिए तेजी से E20 (20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल) ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं।
कंपनियां भी धड़ाधड़ ‘E20 रेडी’ गाड़ियां बाजार में उतार रही हैं। लेकिन ग्राहकों के मन में हमेशा यह डर बना रहता था कि क्या ये गाड़ियां वाकई इस नए ईंधन को झेल पाएंगी?
- कंपनियों की जिम्मेदारी तय हुई: इस फैसले ने साफ कर दिया है कि अगर कंपनियां अपनी गाड़ी को ‘E20 कम्पैटिबल’ बताकर बेच रही हैं, तो ईंधन से गाड़ी खराब होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी खुद कंपनी की होगी।
- उपभोक्ताओं को मिली बड़ी ताकत: अब देश का कोई भी नागरिक ई20 पेट्रोल के कारण गाड़ी खराब होने पर बेझिझक कानूनी रास्ता चुन सकता है।
जरूरी बात :
यह फैसला देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। अब कंपनियों को सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि हकीकत में अपनी गाड़ियों की तकनीक को एथेनॉल फ्रेंडली बनाना होगा। अगर आप भी नई गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अब बेफिक्र होकर कदम बढ़ा सकते हैं—कानून आपके साथ खड़ा है!



