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‘ज्ञानभारतम’ अभियान के तहत तुमान गांव में मिला 80 साल पुराना ब्रिटिश कालीन दस्तावेज, खुली इतिहास की परतें

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरती एक बार फिर अतीत के पन्नों को समेटे हुए चर्चा में है। कोरबा जिले में ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने के लिए चलाए जा रहे “ज्ञानभारतम” राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत एक बेहद ही दुर्लभ कामयाबी हाथ लगी है। पोड़ीउपरोड़ा ब्लॉक के ऐतिहासिक ग्राम तुमान में सर्वेक्षण के दौरान ब्रिटिश शासन काल का एक प्राचीन हस्तलिखित दस्तावेज खोज निकाला गया है।
यह अनूठी खोज अभियान के जिला समन्वयक श्री सतीश प्रकाश सिंह द्वारा की गई है, जो क्षेत्र में प्राचीन कड़ियों को जोड़ने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।

बुजुर्ग बिधून दास महंत के घर छिपा था इतिहास का खजाना

जिला समन्वयक श्री सतीश प्रकाश सिंह के मुताबिक, यह अमूल्य दस्तावेज ग्राम तुमान के निवासी बुजुर्ग बिधून दास महंत के नाती ने सर्वेक्षण टीम को उपलब्ध कराया। जब इस दस्तावेज का बारीकी से अवलोकन किया गया, तो देश की आजादी से पहले के कई रोचक पहलू सामने आए:

  • शाही पहचान: इस पुराने दस्तावेज पर उस दौर के एक रुपये मूल्य के स्टाम्प पर ब्रिटेन के तत्कालीन राजा की तस्वीर छपी हुई है।
  • 80 साल पुराना सफर: यह पूरी तरह से हाथ से लिखा गया (हस्तलिखित) दस्तावेज है, जो लगभग 80 वर्ष पुराना बताया जा रहा है।
  • जीर्ण-शीर्ण हालत: वक्त की मार और रखरखाव के अभाव के कारण इस ऐतिहासिक कागज की स्याही काफी धुंधली हो चुकी है और पन्ने बेहद नाजुक व जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच चुके हैं।
    इस ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए श्री सतीश प्रकाश सिंह ने महंत परिवार और उपस्थित ग्रामीणों को इस दस्तावेज को बेहद सावधानी और सुरक्षा के साथ सहेजने की सलाह दी है।

क्या है ‘ज्ञानभारतम’ मिशन और क्यों है यह जरूरी?

इस खास मौके पर जिला समन्वयक ने ग्रामीणों को इस राष्ट्रीय अभियान के महत्व से रूबरू कराया। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर को नष्ट होने से बचाना और उसे आने वाली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंचाना है।

क्या होती है पाण्डुलिपि?
ऐसी कोई भी ज्ञानवर्धक सामग्री या रचना जो कम से कम 75 वर्ष से अधिक पुरानी हो और जिसे कागज, ताड़पत्र या भोजपत्र पर किसी भी लिपि में हाथ से लिखा गया हो, वह पाण्डुलिपि की श्रेणी में आती है।

‘ज्ञानभारतम एप’ से डिजिटल होगी हमारी विरासत

आज के डिजिटल युग में इन ऐतिहासिक कड़ियों को हमेशा के लिए अमर बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। श्री सतीश प्रकाश सिंह ने ग्रामीणों को “ज्ञानभारतम् एप” के बारे में विस्तार से जानकारी दी और इसे डाउनलोड करने का तरीका सिखाया।
अब कोई भी नागरिक अपने स्मार्टफोन के जरिए:

  1. जो पाण्डुलिपि अभी तक सूचीबद्ध नहीं हुई है, उसे इस एप के माध्यम से पंजीकृत कर सकता है।
  2. प्राचीन दस्तावेजों और पाण्डुलिपियों की साफ फोटो खींचकर एप पर अपलोड कर सकता है।
  3. इस प्रक्रिया से इन दुर्लभ कड़ियों का डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे हमारी संस्कृति हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएगी।
    तुमान गांव में मिले इस ब्रिटिश कालीन दस्तावेज ने यह साबित कर दिया है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आज भी इतिहास के कई गहरे राज और अमूल्य कड़ियां बिखरी हुई हैं, जिन्हें सहेजना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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