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एक पेड़ मां के नाम ..और सारा जंगल किसके नाम? कोंडागांव में लकड़ी परिवहन का मामला गरमाया: सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट से मचा हड़कंप,भाजपा नेत्री पर उठे सवाल(वीडियो)

कोंडागांव: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में बीती रात लकड़ी से लदे एक ट्रक को पकड़े जाने के बाद सोशल मीडिया पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। इस घटना को लेकर स्थानीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
वायरल हो रही इस पोस्ट में केंद्र सरकार के अभियान “एक पेड़ माँ के नाम” पर तंज कसते हुए इसे “सैकड़ों पेड़ जूही तिवारी और भाजपा नेताओं के नाम” बताया गया है। पोस्ट में सीधा आरोप है कि मंचों पर पर्यावरण बचाने के भाषण दिए जाते हैं, जबकि रात के अंधेरे में जंगलों की कटाई और अवैध परिवहन का खेल चल रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट का दावा?

सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के अनुसार, बीती रात वन विभाग के बीट गार्ड ने लकड़ी से भरी एक गाड़ी को रोका था। आरोप है कि यह गाड़ी भाजयुमो कन्या शक्ति संयोजिका जूही तिवारी की है। जब बीट गार्ड ने गाड़ी के वैध कागजात मांगे, तो कथित तौर पर यह जवाब मिला कि गाड़ी के लिए साल भर पहले अनुमति ली गई थी और वर्तमान में गृह मंत्री के कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण दस्तावेज अगले दिन दिखाए जाएंगे। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच गाड़ी को मौके से रवाना कर दिया गया।
इस पूरे मामले में सीधे तौर पर प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप को भी घसीटा जा रहा है। पोस्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या वन विभाग के ऊपर राजनीतिक दबाव है? विपक्ष और स्थानीय जागरूक नागरिकों के हवाले से सोशल मीडिया पर यह पूछा जा रहा है कि यह पर्यावरण संरक्षण का कौन सा मॉडल है।

आरोपों के घेरे में व्यवस्था

यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के आरोप लगे हों। वायरल पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि पहले भी कई बार ऐसी गाड़ियां पकड़ी गईं, लेकिन कथित तौर पर ‘ऊपर’ से फोन आने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। सोशल मीडिया पर अब #जूहीतिवारी, #केदारकश्यपजवाबदो और #कोंडागांव जैसे हैशटैग के साथ लोग अपना आक्रोश जता रहे हैं और कह रहे हैं कि जंगल किसी की जागीर नहीं हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस खबर का आधार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट और स्थानीय स्तर पर चल रही चर्चाएं हैं। हमारी न्यूज वेबसाइट इस वायरल पोस्ट में किए गए दावों, आरोपों और घटनाक्रम की सत्यता की पुष्टि नहीं करती है। इस मामले में वन विभाग या संबंधित भाजपा नेताओं का आधिकारिक पक्ष आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

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