
कहते हैं कि अगर उम्मीद जिंदा हो और पुलिस- प्रशासन की नीयत साफ, तो बरसों पहले बिछड़े अपने भी मिल जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है रायपुर पुलिस की नॉर्थ जोन टीम ने। आज से 6 साल पहले खेलता-कूदता जो मासूम बच्चा अचानक गायब हो गया था, पुलिस ने उसे बेंगलुरु से सकुशल ढूंढ निकाला है। जब 12 साल के हो चुके इस बच्चे को उसकी मां को सौंपा गया, तो मां के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
शक्तिनगर से गायब हुआ था 6 साल का मासूम
यह भावुक कर देने वाली कहानी रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र की है। शक्तिनगर (मस्जिद के सामने) रहने वाली कुंती सोना का 6 वर्षीय बेटा दीपक सोना अचानक कहीं लापता हो गया था। मां ने हर जगह खाक छानी, लेकिन बेटे का कहीं पता नहीं चला। थक-हारकर मां ने खम्हारडीह थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शुरुआत में गुमशुदगी (क्रमांक 34/2026) का मामला दर्ज किया, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में धारा 363 (अपहरण) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की गई।
पुलिस कप्तानों की मुस्तैदी और बेंगलुरु कनेक्शन
मासूम बच्चों की गुमशुदगी के मामलों को लेकर पुलिस हमेशा संवेदनशील रहती है। इस केस को पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) श्री मयंक गुर्जर (IPS) ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त श्री आकाश मरकाम, सहायक पुलिस आयुक्त सुश्री पूर्णिमा लामा और खम्हारडीह थाना प्रभारी सुश्री मानसी नानाभाउ साकोरे (IPS) को बच्चे की तलाश के लिए स्पेशल टास्क सौंप दिया।
थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने नए सिरे से मां और परिवार के लोगों से बातचीत की। कड़ियों को जोड़ने के बाद पुलिस ने जब तकनीकी साक्ष्यों (साइबर सेल और तकनीकी इनपुट्स) का विश्लेषण किया, तो एक चौंकाने वाला सुराग हाथ लगा। पुलिस को पता चला कि जो बच्चा 6 साल पहले रायपुर से गायब हुआ था, वह इस वक्त छत्तीसगढ़ से कोसों दूर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और मां-बेटे का मिलन
पुख्ता जानकारी मिलते ही आला अधिकारियों के निर्देश पर रायपुर पुलिस की एक विशेष टीम तुरंत बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। बेंगलुरु की अनजान गलियों और विशाल आबादी के बीच बच्चे को ढूंढना आसान नहीं था, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। आखिरकार पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दीपक को सकुशल दस्तयाब (बरामद) कर लिया।
6 साल पहले जो दीपक महज 6 साल का बच्चा था, वह अब 12 साल का किशोर हो चुका था। पुलिस टीम उसे लेकर रायपुर लौटी और 17 मई 2026 को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे उसकी मां कुंती सोना के सुपुर्द कर दिया।
आगे की कार्यवाही और पुलिस की वाहवाही
बरसों बाद अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगाकर मां की आंखें छलक आईं। उन्होंने रोते हुए रायपुर पुलिस का आभार जताया। इस बड़ी कामयाबी के बाद पुलिस महकमे में भी खुशी का माहौल है और इस बेहतरीन रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए टीम की जमकर तारीफ हो रही है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बच्चा रायपुर से बेंगलुरु कैसे पहुंचा और इन 6 सालों में उसके साथ क्या-क्या हुआ।



