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छत्तीसगढ़: बच्चों के हुनर को निखारेगा स्कूल शिक्षा विभाग, गर्मियों की छुट्टियों में लगेंगे ‘समर कैंप’

गर्मियों की छुट्टियां सिर्फ घर पर बैठकर टीवी देखने या मोबाइल गेम खेलने के लिए नहीं हैं, बल्कि यह समय बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाने का है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने एक बेहतरीन पहल की है। विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को निर्देश जारी किए हैं कि 15 जून 2026 तक चलने वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान छात्र-छात्राओं के लिए विशेष ‘समर कैंप’ का आयोजन किया जाए।
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इन कैंपों का उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है, जिसमें शिक्षकों के साथ-साथ पालकों (माता-पिता) की भी सक्रिय भागीदारी होगी।

कहाँ और कब लगेंगे कैंप?

यह समर कैंप पूरी तरह स्वैच्छिक होंगे। यानी बच्चों पर कोई दबाव नहीं होगा। धूप और गर्मी को देखते हुए इसके समय और स्थान का विशेष ध्यान रखा गया है:

  • समय: रोजाना सुबह 7:30 बजे से 9:30 बजे तक (सिर्फ दो घंटे)।
  • स्थान: स्कूल परिसर या फिर गांव और शहरों के स्थानीय सामुदायिक भवन।
  • निर्णय का अधिकार: स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए कैंप की अवधि तय करने या जरूरत पड़ने पर इसे स्थगित करने का पूरा अधिकार जिला कलेक्टरों के पास होगा।

समर कैंप में क्या-क्या सीख सकेंगे बच्चे?

इन कैंपों में बच्चों को पारंपरिक पढ़ाई से हटकर कुछ नया और रचनात्मक सीखने का मौका मिलेगा। इसके तहत कई मजेदार गतिविधियां आयोजित की जाएंगी:

  • कला और संस्कृति: चित्रकारी (पेंटिंग), गायन-वादन, और नृत्य (डांस)।
  • लेखन कौशल: निबंध लेखन, कहानी लेखन और सुंदर लिखावट (हस्तलिपि) का अभ्यास।
  • खेलकूद और इतिहास: शारीरिक विकास के लिए खेलकूद और अपने गांव या शहर के ऐतिहासिक महत्व को जानने का मौका।
  • विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: कला और रचनात्मक क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स को बुलाकर बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
  • इंडस्ट्रियल विजिट: बच्चों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालने के लिए नजदीकी औद्योगिक संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों का शैक्षणिक भ्रमण (टूर) भी कराया जाएगा।

बजट और जनसहयोग

इस आयोजन के लिए सरकार की तरफ से कोई अलग से बजट जारी नहीं किया जा रहा है। इसे पूरी तरह से स्थानीय संसाधनों और कम्युनिटी (जनसहयोग) की मदद से चलाया जाएगा। कैंप शुरू करने से पहले शाला विकास समिति और पालक-शिक्षक समिति (PTA) की सहमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, शिक्षक और पालक मिलकर बच्चों के समर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में उनकी मदद करेंगे।

इस समर कैंप से बच्चों को क्या होंगे लाभ?

शिक्षकों और पालकों के इस साझा प्रयास से बच्चों को कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं:

  • छिपी हुई प्रतिभा की पहचान: रोजमर्रा की पढ़ाई से अलग जब बच्चे पेंटिंग, डांस या राइटिंग जैसी गतिविधियों में भाग लेंगे, तो उनकी असली रुचि और हुनर सामने आएगा।
  • सोशल स्किल्स और व्यक्तित्व विकास: मोबाइल स्क्रीन से दूर होकर जब बच्चे सामूहिक गतिविधियों का हिस्सा बनेंगे, तो उनमें टीम वर्क, लीडरशिप और बातचीत करने की कला (कम्युनिकेशन स्किल्स) का विकास होगा।
  • प्रैक्टिकल नॉलेज: मेडिकल कॉलेज और फैक्ट्रियों के भ्रमण से बच्चों को यह समझने में मदद मिलेगी कि दुनिया कैसे काम करती है, जिससे उनका सामान्य ज्ञान बढ़ेगा।
  • समय का सही सदुपयोग: छुट्टियों के दिनों में बच्चे अक्सर बोर होने लगते हैं या स्क्रीन टाइम बढ़ा देते हैं। सुबह के दो घंटे का यह कैंप उन्हें दिनभर ऊर्जावान और सकारात्मक बनाए रखेगा।
  • पालक और शिक्षकों का मजबूत रिश्ता: इस कैंप के जरिए माता-पिता और शिक्षकों के बीच एक बेहतर तालमेल बनेगा, जिसका सीधा फायदा बच्चे की शिक्षा और भविष्य को मिलेगा।
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