
(चकरभाठा ) इस वक्त चकरभाठा इलाके में अफवाहों का बाजार गर्म नहीं, बल्कि दहक रहा है! मामला एक चोरी हुए इंडक्शन से शुरू हुआ, और खत्म हुआ है चकरभाठा पुलिस की नाक के नीचे से दो शातिर चोरों के ‘नौ दो ग्यारह’ होने पर! मगर इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि चोरी हुई कहां थी? . हमारे अंदरूनी सूत्रों की मानें तो, पुलिस ने चोरी के आरोप में दो संदिग्धों को धर दबोचा था। कहानी में ट्विस्ट यहीं आता है। फुसफुसाहटों के अनुसार, यह चोरी किसी आम नागरिक के घर नहीं, बल्कि एक पुलिस कर्मचारी के निवास पर हुई थी!
अगर यह सच है, तो यह घटना सीधे पुलिस महकमे की साख पर सवाल खड़ा करती है। क्या खाकी वर्दी वाले भी सुरक्षित नहीं हैं?
‘साधारण धारा’ का खेल और फिर ‘फरार’ का ड्रामा!
सूत्रों का कहना है कि बदनामी से बचने के लिए, विभाग ने चोरी की धाराओं को हल्का फुल्का रखने पर विचार किया होगा—वही ‘खाना पूर्ति’ वाला अंदाज। लेकिन, हाय रे किस्मत! शायद पुलिस ने भी नहीं सोचा होगा कि अपराधियों के पास इस कहानी का अगला ‘पटकथा’ तैयार है।
पुलिस अभिरक्षा में रखे गए दोनों आरोपी, मौके का फायदा उठाकर, रातों-रात या दिन-दहाड़े… सीधे ‘पिक्चर’ से गायब हो गए!
गजब की बात यह है कि ये शातिर अपराधी अपने पीछे हथकड़ी तक छोड़ जाने की जहमत नहीं उठाए! अब सवाल यह है कि: आखिर कहाँ गये ये दोनों?
ना निगलते बने, ना उगलते: उच्च अधिकारियों की तलवार
चकरभाठा पुलिस अब एक विकराल समस्या में फंसी है। यह मामला अब ‘ना निगलते बने, ना उगलते’ वाली स्थिति में आ गया है। अब देखना यह है कि बिलासपुर के उच्च अधिकारी इस ‘कारगुजारी’ पर क्या रुख अपनाते हैं?
- क्या पुलिस महकमा अपने पुलिस पर भी जांच उसी तेजी और मुस्तादी से करेगा, जैसे वह अन्य अपराधियों पर करता है?
- क्या यह मामला सिर्फ ‘रफ़ा-दफा’ होकर शांत हो जाएगा?
- या फिर यह ‘यक्ष प्रश्न’ किसी अधिकारी -कर्मचारी की कुर्सी की बली लेगा।



