
रायगढ़ का विश्व प्रसिद्ध चक्रधर समारोह अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार इसके समापन ने एक ऐसा दाग छोड़ा है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है। जिस समारोह के मंच पर खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिरकत की, उसी समारोह की यादें अगले ही दिन जमीन पर बिखरी पड़ी मिलीं। ये कोई मामूली कचरा नहीं था, बल्कि पद्मश्री कैलाश खेर और उनकी टीम के सम्मान में दिए गए प्रशस्ति पत्र थे, जो कूड़े की तरह फेंके गए थे।
क्या है पूरा मामला?
चक्रधर समारोह के समापन के बाद जब आयोजन स्थल से टेंट हटाए जा रहे थे, तब वहां मौजूद लोगों ने जो देखा, वो हैरान कर देने वाला था। जमीन पर बिखरे कचरे के बीच कुछ कागजात पड़े थे। पास जाकर देखा तो पता चला कि ये कोई साधारण कागज़ नहीं, बल्कि समारोह में सम्मानित किए गए कलाकारों के प्रशस्ति पत्र थे। इनमें से एक पर साफ-साफ लिखा था, “पद्मश्री कैलाश खेर”। उनके साथ उनकी टीम के सदस्यों के भी प्रशस्ति पत्र जमीन पर पड़े मिले।
सम्मान का ऐसा अपमान क्यों?
जिस राजा चक्रधर सिंह की कला और संस्कृति के प्रति समर्पण की तारीफें मंच से लेकर अखबारों तक में हो रही थीं, उन्हीं की तस्वीर लगा यह सम्मान पत्र आखिर जमीन पर क्यों फेंका गया? क्या यह सिर्फ लापरवाही थी या किसी की जानबूझकर की गई हरकत?
यह समझना मुश्किल है कि पद्मश्री से सम्मानित किसी कलाकार के सम्मान पत्र को इस तरह कूड़े की तरह फेंकने की हिम्मत किसने की होगी। यह किसी आम आदमी का काम नहीं हो सकता। यह घटना सीधे तौर पर आयोजकों या किसी जिम्मेदार व्यक्ति की मानसिकता पर सवाल उठाती है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
- क्या कैलाश खेर और उनकी टीम को दिए गए प्रशस्ति पत्र की कोई अहमियत नहीं थी?
- अगर उन्हें यह सम्मान दिया गया था, तो यह जमीन पर कैसे पहुंचा?
- क्या यह मान लिया जाए कि इतने बड़े आयोजन में सम्मान सिर्फ दिखावा होता है, जिसका असली मूल्य कागज़ के एक टुकड़े से ज्यादा नहीं?



