
छत्तीसगढ़ की राजधानी में रविवार को एक गिरफ्तारी ने सबको चौंका दिया। हत्या और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों में जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी, करण पोर्ते, एम्स हॉस्पिटल से चकमा देकर फरार हो गया था। लेकिन रायपुर पुलिस ने सिर्फ 12 घंटों के भीतर, फिल्मी अंदाज में उसे धर दबोचा। पुलिस और जीआरपी की इस संयुक्त कार्रवाई ने दिखा दिया कि कानून के हाथ कितने लंबे हैं।
ऐसे दिया था पुलिस को चकमा
मंदिर हसौद थाने में दर्ज हत्या के मामले में आरोपी करण पोर्ते (22) रायपुर सेंट्रल जेल में बंद था। 6 सितंबर 2025 को उसकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे इलाज के लिए एम्स हॉस्पिटल लाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान, उसने मौका देखकर जेलकर्मियों की आंखों में धूल झोंकी और फरार हो गया। इस घटना से रायपुर पुलिस में हड़कंप मच गया। तुरंत ही सेंट्रल जेल के जेलकर्मी की शिकायत पर आमानाका थाने में फरार होने का एक और मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने बिछाया जाल
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और आमानाका पुलिस थाने की एक संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने तुरंत अपनी जांच शुरू की। मुखबिरों को एक्टिव किया गया और तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश की जाने लगी।
जांच के दौरान, पुलिस को सूचना मिली कि करण पोर्ते ट्रेन के जरिए भागने की कोशिश कर रहा है। यह जानकारी मिलते ही टीम ने बिना समय गंवाए जीआरपी और आरपीएफ से संपर्क किया। दोनों विभागों के साथ मिलकर एक बड़ा जाल बिछाया गया। पुलिस और जीआरपी की टीमों ने मिलकर ट्रेन के हर संभावित रूट पर निगरानी बढ़ा दी।
और फिर हुआ ‘द एंड’
पुलिस की रणनीति सफल रही। दुर्ग में जीआरपी पुलिस की मदद से आरोपी करण पोर्ते को पकड़ लिया गया। एम्स हॉस्पिटल से फरार होने के महज 12 घंटों के भीतर वह एक बार फिर सलाखों के पीछे था। इस तेजी से हुई गिरफ्तारी ने रायपुर पुलिस की मुस्तैदी और आपसी समन्वय की मिसाल पेश की है।
करण पोर्ते, जो सेरीखड़ी गोंडपारा का रहने वाला है, अब जेल से फरार होने और हत्या के प्रयास, दोनों मामलों में कानून का सामना करेगा।



