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व्यापारियों का आक्रोश: “जीएसटी ने जीवन मुश्किल कर दिया है!” – छत्तीसगढ़ के कारोबारी क्यों मांग रहे हैं वित्त मंत्री से न्याय?

छत्तीसगढ़ के कारोबारियों ने अपनी आवाज को दिल्ली तक पहुंचा दिया है। राज्य के प्रमुख व्यापारिक संगठन, छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर जीएसटी और आयकर अधिकारियों की “मनमानी” और “अत्याचार” के खिलाफ एक मजबूत शिकायत दर्ज की है। उनकी साफ मांग है: व्यापार को आसान बनाइए, मुश्किल नहीं!

व्यापारियों ने वित्त मंत्री को बताया कि जीएसटी प्रणाली, जिसे ‘वन नेशन, वन टैक्स’ (One Nation, One Tax) के सपने के साथ लाया गया था, अब उनके लिए एक दुःस्वप्न बनती जा रही है। उन्होंने कई ऐसे मामले गिनाए, जहाँ अधिकारियों ने छोटी-छोटी तकनीकी गलतियों पर लाखों का जुर्माना लगा दिया, या फिर बिना किसी ठोस वजह के अचानक छापे मारकर डर का माहौल बना दिया।

चैंबर के अध्यक्ष ने कहा, “हमारी लड़ाई जीएसटी के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके जटिल नियमों और अधिकारियों की मनमानी के खिलाफ है। ई-वे बिल में एक छोटी सी गलती पर ट्रक को जब्त कर लिया जाता है, जिससे समय और पैसा दोनों का नुकसान होता है। क्या यह व्यापार करने की सहूलियत है?”

क्या आप भी इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं?

व्यापारियों ने जीएसटी पंजीकरण रद्द करने, इनपुट टैक्स क्रेडिट में देरी और अनावश्यक कागजी कार्रवाई जैसी समस्याओं पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने मांग की है कि जीएसटी काउंसिल इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे और नियमों को सरल बनाए।

यह शिकायत केवल जीएसटी तक ही सीमित नहीं थी। आयकर अधिकारियों की लंबी और बेवजह की जांच से भी कारोबारियों में भारी रोष है। चैंबर ने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि आयकर विभाग को नोटिस भेजने से पहले अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन शिकायतों पर क्या कदम उठाती है। क्या वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कारोबारियों के इस दर्द को समझकर उन्हें राहत देंगी, या फिर उन्हें यह जटिल और चुनौतीपूर्ण लड़ाई अकेले ही लड़नी होगी?

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