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आयकर विभाग को बड़ा झटका! हाई कोर्ट ने कहा- 89% उपज का गणित बेबुनियाद, जबरन नहीं थोप सकते टैक्स

छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आयकर विभाग के उस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें एक स्टील कंपनी पर सिर्फ अनुमान के आधार पर करोड़ों का टैक्स लगा दिया गया था। कोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ कहा कि किसी भी करदाता की आय का आकलन केवल गणितीय अनुमानों या ‘आदर्श’ उपज के आधार पर नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत न हो। यह फैसला देश भर की कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है।


क्या है पूरा मामला?
यह मामला अभिषेक स्टील इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़ा है। साल 2011 में आयकर विभाग ने कंपनी पर छापा मारा था और अपनी जांच में दावा किया कि कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता (yield) को छिपाकर ₹11.68 करोड़ की आय को छुपाया है। विभाग ने यह अनुमान इस आधार पर लगाया था कि स्टील उद्योग में 89% की उपज होनी चाहिए, जबकि कंपनी ने कम उपज दिखाई थी।


कंपनी ने क्या तर्क दिया?
कंपनी ने आयकर आयुक्त (अपील) और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के सामने यह साबित किया कि विभाग का अनुमान गलत था।

  • सच्चाई कुछ और थी: कंपनी की तरफ से बताया गया कि उनकी वास्तविक घोषित उपज 83.94% थी, जो कि आयकर विभाग के अनुमान से तो कम थी, लेकिन उद्योग के औसत 81.35% से कहीं बेहतर थी।
  • मुनाफा भी था बेहतर: कंपनी ने यह भी दिखाया कि उनके लाभ का आंकड़ा भी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी मजबूत था।

जब आयकर विभाग ने इस मामले को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी, तो कोर्ट ने भी कंपनी के पक्ष में ही फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि विभाग के पास अपने दावे को साबित करने के लिए कोई भी ठोस या पुख्ता सबूत नहीं था।


अदालत ने कहा कि टैक्स का आकलन सिर्फ “pure guesswork” (केवल अंदाजे) पर नहीं, बल्कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर होना चाहिए। कोर्ट ने माना कि निचले प्राधिकरणों का फैसला सही था और इसमें किसी भी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।


यह फैसला साबित करता है कि कानूनी प्रक्रिया में अनुमान नहीं, बल्कि सबूत ही मायने रखते हैं। यह फैसला न केवल अभिषेक स्टील के लिए बल्कि सभी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन गया है, जो टैक्स विभाग की मनमानी पर लगाम लगा सकता है।

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