
जन्माष्टमी का पावन पर्व, शहर में उत्सव का माहौल… और फिर एकाएक चीख-पुकार! रविवार शाम रायगढ़ के मीना बाजार में लगे एक अनोखे, नए झूले ने लोगों की सांसें अटका दीं। हुआ यूं कि झूले की मोटर अचानक दगा दे गई और उसमें बैठे दर्जनों लोग, जिनमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं, करीब दो घंटे तक हवा में फंसे रहे! यह मंजर किसी हॉरर फिल्म से कम नहीं था, जिसने आस्था और उल्लास के पर्व को खौफ में बदल दिया।
आप कल्पना कर सकते हैं? दो घंटे… आसमान में लटके हुए… कभी तेज धूप शरीर जला रही थी तो कभी अचानक बारिश की बूंदें सन्नाटा तोड़ रही थीं! नीचे परिजन बेबसी में रो रहे थे, अपने प्रियजनों की सलामती के लिए दुआएं मांग रहे थे, और ऊपर फंसे लोगों की घबराहट हर पल बढ़ती जा रही थी। यह तो गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, वरना रायगढ़ में एक बड़ा मातम छा जाता।
मीना बाजार की खुली पोल: सुरक्षा को ताक पर रखकर खेला गया मौत का खेल!
इस घटना ने मीना बाजार के कुप्रबंधन और घोर लापरवाही की सारी हदें पार कर दीं। मौके पर न कोई वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था, न आपातकालीन प्लान! सवाल सीधा सा है: आखिर बिना किसी तकनीकी जांच के इस ‘मौत के झूले’ को मेले में लगाने की इजाजत मिली कैसे? क्या जिला प्रशासन और नगरपालिका अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे थे? क्या स्थानीय अधिकारियों ने इस नए झूले की सुरक्षा जांच को नजरअंदाज किया?
स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका साफ कहना है कि अगर झूले की मशीन जरा भी टूट जाती तो रायगढ़ में लाशों के ढेर लग जाते! यह तो भगवान का शुक्र था कि बड़ा हादसा टल गया। लेकिन यह घटना शहर के मनोरंजन स्थलों में सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
2 घंटे बाद आई ‘जीवन की किरण’: क्रेन ने पहुंचाया जमीन पर, पर सहम गए लोग
करीब दो घंटे बाद, जब लोगों का धैर्य जवाब दे चुका था, तब कहीं जाकर क्रेन की मदद से फंसे लोगों को नीचे उतारा गया। लेकिन तब तक बच्चों और महिलाओं की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। परिजन अपने अपनों को गले लगाकर फूट-फूटकर रो रहे थे। यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि घोर लापरवाही का परिणाम था, जिसने सैकड़ों जिंदगियों को दांव पर लगा दिया।
इस घटना के बाद रायगढ़ में झूलों को लेकर दहशत का माहौल व्याप्त है। शहरवासी अब मीना बाजार संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। आखिर किसकी लापरवाही ने इतने लोगों की जान खतरे में डाली? क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ पाएगा? यह देखना बाकी है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सार्वजनिक सुरक्षा को कभी भी हल्के में नहीं लिया जा सकता।



