राष्ट्रीय खबरसाइबर क्राइम

बड़ा खुलासा: साइबर ठगी से हुई ₹101 करोड़ की टेरर फंडिंग, पिता-पुत्र गिरफ्तार!

उत्तर प्रदेश: एक चौंकाने वाले खुलासे ने देश भर में हड़कंप मचा दिया है! उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसका सीधा संबंध ₹101 करोड़ से अधिक की टेरर फंडिंग से निकला है। इस सनसनीखेज मामले में बिहार के चंपारण निवासी एक पिता-पुत्र, भूषण चौधरी और गोलू कुमार को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना साइबर अपराध और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच बढ़ते खतरनाक गठजोड़ को उजागर करती है।

कैसे हुई ये ₹101 करोड़ की फंडिंग?
पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह पूरा घोटाला चीनी लोनिंग ऐप्स के जरिए चलाया जा रहा था। इन ऐप्स के जाल में फंसाकर भोले-भाले लोगों से पैसे ऐंठे जाते थे। लेकिन असली खेल इसके बाद शुरू होता था। धोखाधड़ी से हासिल की गई इस भारी-भरकम रकम को सीधे आतंकवादियों तक नहीं भेजा जाता था, बल्कि इसे एक जटिल मनी लॉन्ड्रिंग प्रक्रिया के तहत क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था।


क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल इसलिए किया गया क्योंकि यह पारंपरिक बैंकिंग चैनलों की तुलना में अधिक गुमनामी प्रदान करती है और पैसों के लेन-देन को ट्रैक करना बेहद मुश्किल बना देती है। जांच में पता चला है कि यह पैसा नेपाल और भारत के कुछ खातों (जैसे गिरफ्तार पिता-पुत्र के खाते) से होते हुए पाकिस्तान सहित कई अन्य जगहों पर भेजा जा रहा था।


अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और सरगना का पर्दाफाश
यह सिर्फ एक सामान्य धोखाधड़ी का मामला नहीं था। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का एक अंतर्राष्ट्रीय सरगना ‘सस्पियर’ भी पहले ही पकड़ा जा चुका है, जो इस नेटवर्क की वैश्विक पहुंच को दर्शाता है। गिरफ्तार भूषण चौधरी और गोलू कुमार के बैंक खातों से अकेले ₹101 करोड़ 34 लाख से अधिक की फंडिंग का पता चला है, जो इस रैकेट के चौंकाने वाले पैमाने को बयां करता है। उनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन और नेपाली मुद्रा भी बरामद हुई है, जो उनके अंतर-राज्यीय और संभवतः अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की पुष्टि करती है।


टेरर फंडिंग: एक गंभीर राष्ट्रीय खतरा
यह मामला इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे आपराधिक गतिविधियां, विशेष रूप से साइबर धोखाधड़ी, सीधे तौर पर देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। टेरर फंडिंग का मतलब उन गतिविधियों से है जिनके माध्यम से आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को अपने हिंसक कृत्यों को अंजाम देने के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। इसमें ड्रग तस्करी, हथियारों की तस्करी, जबरन वसूली, कालाबाजारी और धोखाधड़ी जैसे अवैध स्रोतों के साथ-साथ कुछ वैध दिखने वाले स्रोतों से भी धन जुटाया जाता है।


यह गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश पुलिस की एक बड़ी सफलता है और यह दिखाती है कि कैसे हमारी सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे जटिल और खतरनाक नेटवर्कों पर नकेल कसने के लिए काम कर रही हैं। इस खुलासे के बाद, आम जनता को भी ऑनलाइन धोखाधड़ी और अज्ञात स्रोतों से आने वाले पैसे के लेन-देन के प्रति अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

Join Dainik Bodh Whatsapp Community

Related Articles

Back to top button