बस्तर के कथित नक्सल मुक्ति के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का दंतेवाड़ा दौरा?? जानें क्यों खास है छिंदनार का खेल मैदान जहाँ आएंगे क्रिकेट के भगवान…

दंतेवाड़ा। कभी गोलियों की गूंज और नक्सली खौफ के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर के जंगलों में अब खेल की किलकारियां गूंजेंगी। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर जल्द ही अपने पूरे परिवार के साथ दंतेवाड़ा के छिंदनार पहुंचने वाले हैं। बस्तर के ‘नक्सल मुक्त’ घोषित होने के बाद सचिन का यह दौरा न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि शांति और विकास की एक नई तस्वीर दुनिया के सामने पेश करेगा।
खौफ के साये में शुरू हुआ था ‘मैदान’ का सफर
तेंदुलकर फाउंडेशन ने दंतेवाड़ा में खेल प्रतिभाओं को तराशने का बीड़ा तब उठाया था, जब यहाँ की परिस्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। फाउंडेशन का मानना था कि अगर बच्चों के हाथों में बंदूक की जगह बल्ला और गेंद होगी, तो भविष्य बेहतर होगा। इसी सोच के साथ ‘मैदान कप’ की शुरुआत की गई और छिंदनार में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का मॉडल खेल मैदान तैयार किया गया।
क्यों खास है छिंदनार का यह खेल मैदान?
- ग्रामीणों का श्रमदान: इस मैदान को किसी बड़े ठेकेदार ने नहीं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने खुद पसीना बहाकर तैयार किया है।
- मल्टी-स्पोर्ट्स सुविधा: यहाँ सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि एथलेटिक्स, फुटबॉल, कबड्डी और खो-खो जैसे खेलों के लिए भी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
- ट्रेनिंग सेंटर: छिंदनार को एक ‘हब’ बनाया गया है, जहाँ से ट्रेनिंग लेकर युवा जिले के अन्य 50 गांवों में भी खेल मैदान विकसित कर रहे हैं।
सपरिवार आगमन और बच्चों से सीधा संवाद
सूत्रों के अनुसार, सचिन तेंदुलकर अपने इस दौरे के दौरान न केवल छिंदनार के मॉडल मैदान का निरीक्षण करेंगे, बल्कि वहां मौजूद नन्हे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेलकर उनका उत्साहवर्धन भी करेंगे। सचिन का परिवार भी उनके साथ होगा, जो दंतेवाड़ा की प्रसिद्ध दंतेश्वरी माता के दर्शन भी कर सकता है।
शांति का बड़ा संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि सचिन जैसे वैश्विक व्यक्तित्व का बस्तर आना यह साबित करता है कि अब यह क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। यह दौरा बस्तर में पर्यटन और निवेश के नए रास्ते खोलेगा। छिंदनार के बच्चों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है कि जिस खिलाड़ी को उन्होंने टीवी पर देखा, वह अब उनके बीच उन्हीं की मिट्टी पर खेलेंगे।



