अंतरराष्ट्रीय पटल पर रायपुर की चमक: डॉ. नायक की नई वनस्पति खोज ‘फाइकस नायकाई’ ने रचा इतिहास

रायपुर: छत्तीसगढ़ की मिट्टी ने एक बार फिर विज्ञान की दुनिया में अपनी चमक बिखेरी है। शासकीय दूधाधारी बजरंग स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय (डिग्री गर्ल्स कॉलेज) में एक विशेष गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. नायक का भव्य अभिनंदन हुआ। यह सम्मान उनकी उस ऐतिहासिक खोज के लिए दिया गया है जिसने वैश्विक पादप विज्ञान (Plant Science) के नक्शे पर भारत का मान बढ़ाया है।
क्या है डॉ. नायक की उपलब्धि?
डॉ. नायक ने पौधों की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसे अंतरराष्ट्रीय संस्था ICBN (International Code of Botanical Nomenclature) द्वारा आधिकारिक तौर पर ‘फाइकस नायकाई’ (Ficus nayakae) नाम दिया गया है। किसी भी वैज्ञानिक के लिए उसकी खोज को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना और उसका नामकरण होना एक दुर्लभ और गौरवशाली उपलब्धि मानी जाती है।
कॉलेज में उत्साह का माहौल
वनस्पति शास्त्र एवं बायोटेक्नोलॉजी परिषद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज की प्राचार्य डॉ. जया तिवारी के मार्गदर्शन में डॉ. नायक का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि है।
छात्रों को मिला सफलता का मंत्र
सम्मान से अभिभूत डॉ. नायक ने कॉलेज की छात्राओं के साथ संवाद किया। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि अनुसंधान (Research) के क्षेत्र में सफलता के लिए सकारात्मक सोच, निरंतर परिश्रम और अपने काम के प्रति अटूट समर्पण सबसे आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को विज्ञान के क्षेत्र में नए नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम की खास झलकियां
- संचालन: डॉ. अंकिता चौधरी ने कार्यक्रम का कुशलतापूर्वक संचालन किया।
- अध्यक्षता: वनस्पति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव आचार्य ने की।
- विशिष्ट उपस्थिति: डॉ. अरविंद गिरोलकर, डॉ. राजेंद्र मिश्रा, डॉ. किरण श्रीवास्तव, डॉ. जे.एन. वर्मा, डॉ. प्रकाश कौर सलूजा और डॉ. अरुणा श्रीवास्तव जैसे दिग्गज शिक्षाविद् उपस्थित रहे।
- सहयोग: इस अवसर पर डॉ. दीपा श्रीवास्तव, डॉ. बी.एम. लाल, विनीता साहू, डॉ. पूनम देवांगन, डॉ. सीमा साहू और संजना साहू सहित अन्य प्राध्यापकों ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
छत्तीसगढ़ के किसी वैज्ञानिक की इस वैश्विक पहचान ने यह साबित कर दिया है कि यदि संसाधन और संकल्प का मेल हो, तो स्थानीय स्तर पर किए गए शोध भी दुनिया को नई दिशा दिखा सकते हैं।




