न्याय और विज्ञान का संगम: पुलिस विशेषज्ञों ने कलिंगा यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक विद्यार्थियों के साथ साझा की आधुनिक विवेचना की बारीकियां(रायपुर)

अपराध की बदलती प्रकृति और आधुनिक तकनीकों के इस दौर में अब पुलिस और विज्ञान का तालमेल और भी महत्वपूर्ण हो गया है। इसी कड़ी में ‘संवाद से समाधान’ कार्यक्रम के अंतर्गत आज कलिंगा यूनिवर्सिटी के फॉरेंसिक साइंस के छात्र-छात्राओं के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। सिविल लाइंस स्थित सी/04 भवन के सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस के आला अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भावी फॉरेंसिक विशेषज्ञों को कानूनी और तकनीकी बारीकियों से रूबरू कराया गया।
कमिश्नरेट सिस्टम और साइबर सुरक्षा पर मंथन
कार्यशाला के मुख्य वक्ता अतिरिक्त डीसीपी तारकेश्वर पटेल और एसीपी दीपक मिश्रा ने छात्रों को पुलिस की कार्यप्रणाली और ‘कमिश्नरेट सिस्टम’ के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे एक संगठित सिस्टम के जरिए शहर की कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है।
बढ़ते डिजिटल अपराधों पर चिंता जताते हुए अधिकारियों ने साइबर फ्रॉड के नए तरीकों और उनसे बचने के सुरक्षा उपायों पर विशेष जानकारी दी। छात्रों को बताया गया कि कैसे फॉरेंसिक साक्ष्य किसी भी साइबर अपराधी को कानून के शिकंजे तक पहुँचाने में सबसे बड़ी कड़ी साबित होते हैं।
मेडिको-लीगल: जब विज्ञान देता है न्याय को दिशा
वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. चंद्रा ने मेडिको-लीगल मामलों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को समझाया कि घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट किस तरह कोर्ट में न्याय दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। फॉरेंसिक विद्यार्थियों के लिए यह सत्र बेहद रोमांचक रहा, क्योंकि उन्हें किताबी ज्ञान से हटकर सीधे फील्ड के विशेषज्ञों से प्रैक्टिकल अनुभव जानने का मौका मिला।
किताबों से बाहर निकलकर ‘थाना कोतवाली’ का भ्रमण
सभाकक्ष में संवाद के बाद, विद्यार्थियों को थ्योरी से प्रैक्टिकल की ओर ले जाने के लिए थाना कोतवाली का भ्रमण कराया गया है। यहाँ छात्र प्रत्यक्ष रूप से देखेंगे कि एक थाने की कार्यप्रणाली कैसी होती है, एफआईआर (FIR) की प्रक्रिया क्या है और साक्ष्यों को पुलिस रिकॉर्ड में कैसे सुरक्षित रखा जाता है।
जागरूकता ही है असली समाधान
‘संवाद से समाधान’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल छात्रों को शिक्षित करना है, बल्कि समाज में एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो कानून और तकनीक दोनों में सक्षम हो। विशेषज्ञों का मानना है कि जब युवा छात्र पुलिसिंग की चुनौतियों को करीब से समझेंगे, तभी वे समाज को अपराध मुक्त बनाने में अपना सक्रिय योगदान दे पाएंगे।
मुख्य आकर्षण:
- विशेषज्ञ मार्गदर्शन: पुलिस अधिकारियों और वैज्ञानिकों का सीधा संवाद।
- प्रैक्टिकल एक्सपोजर: थाना भ्रमण के जरिए पुलिस की कार्यप्रणाली को समझने का मौका।
- फोकस: साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक साक्ष्य और कानूनी जागरूकता।



