जंगल की आग उगल रही धन! ₹1600 क्विंटल तक पहुंचा पलाश के फूलों का दाम, छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों की चमकी किस्मत।

छत्तीसगढ़ के जंगलों में जिसे कभी सिर्फ ‘जंगल की आग’ (Flame of the Forest) कहकर पुकारा जाता था, वही पलाश के फूल आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ‘लाल सोना’ साबित हो रहे हैं। वसंत ऋतु की दस्तक के साथ ही बस्तर से लेकर सरगुजा तक के जंगलों में खिले नारंगी पलाश के फूल न केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ा रहे हैं, बल्कि आदिवासियों और वनवासियों की जेबें भी भर रहे हैं।
आस्था और आय का अनोखा संगम
पलाश (टेसू) का फूल सिर्फ एक वनस्पति नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र भी है। माना जाता है कि ये फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं और इन्हें तिजोरी में रखने से सुख-समृद्धि आती है। लेकिन आज यह आस्था, आर्थिक मजबूती का जरिया बन चुकी है। छत्तीसगढ़ के कटघोरा वनमण्डल के पसान, केन्दई और पाली जैसे क्षेत्रों में पलाश के फूलों का संग्रहण अब एक बड़े व्यापार का रूप ले चुका है।
₹900 से ₹1600 का सफर: मुनाफे की जबरदस्त छलांग
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पलाश की मांग बाजार में तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022-23 में जो पलाश ₹900 प्रति क्विंटल बिकता था, उसका दाम वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹1600 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के इस प्रयास से संग्राहकों को उनकी मेहनत का सीधा और बेहतर लाभ मिल रहा है। हाल ही में कई संग्राहकों को ₹87,400 का भुगतान किया गया है, जो ग्रामीण स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि है।
हर्बल गुलाल और आयुर्वेद में भारी डिमांड
पलाश के फूलों की इस बढ़ती कीमत के पीछे सबसे बड़ा कारण है ‘केमिकल फ्री’ लाइफस्टाइल। पलाश के फूलों से बने प्राकृतिक और हर्बल गुलाल की मांग अब महानगरों तक पहुंच गई है। ‘पलाश ब्रांड’ के तहत ग्रामीण महिलाएं इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर रही हैं। इसके अलावा:
- औषधीय गुण: डायबिटीज, चर्म रोग और पेट के कीड़ों के इलाज में यह रामबाण माना जाता है।
- इको-फ्रेंडली विकल्प: पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने अब शादियों में प्लास्टिक का सबसे बेहतरीन विकल्प बनकर उभरे हैं।
आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
वन धन विकास केंद्रों के माध्यम से अब स्थानीय लोगों को न केवल संग्रहण, बल्कि मार्केटिंग और प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। शासन का लक्ष्य है कि आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल की सभी समितियों को इससे जोड़कर हर घर तक समृद्धि पहुंचाई जाए।
निश्चित रूप से, पलाश के ये सुर्ख लाल फूल अब छत्तीसगढ़ के वनवासियों के जीवन में खुशहाली का नया रंग भर रहे हैं। यह कहानी सिर्फ एक फूल की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और जल-जंगल-जमीन के सही उपयोग की एक प्रेरणादायक मिसाल है।




