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IGKV स्थापना दिवस: नए उत्पाद केंद्र का आगाज़, ब्राजील के मेहमानों ने भी जाना छत्तीसगढ़ी खेती का दम

छत्तीसगढ़ की कृषि तकनीक और किसानों के उत्पादों को अब एक नई पहचान और बड़ा बाजार मिलने जा रहा है। राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) ने अपने 39वें स्थापना दिवस के अवसर पर ‘उत्पाद विक्रय केन्द्र’ को एक बिल्कुल नए और आधुनिक स्वरूप में जनता को समर्पित किया है।
क्या है इस नए केंद्र की खासियत?
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने इस केंद्र का उद्घाटन करते हुए बताया कि इसे एक ‘कॉमर्शियल बिजनेस मॉडल’ पर विकसित किया गया है। यहाँ न केवल विश्वविद्यालय के अपने शोध उत्पाद मिलेंगे, बल्कि कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) से जुड़े किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पाद भी उपलब्ध होंगे।

  • किराना और गैर-किराना सामान: यहाँ लोगों को शुद्ध ग्रोसरी आइटम्स के साथ-साथ खेती से जुड़े अन्य जरूरी सामान भी मिलेंगे।
  • क्वालिटी का भरोसा: उत्पादों की गुणवत्ता और सप्लाई चेन पर कृषि विशेषज्ञों की सीधी नजर रहेगी।
  • मार्केट लिंकेज: गाँव के छोटे समूहों को शहर के बड़े बाजार से जोड़ने की यह एक बड़ी पहल है।
    विशिष्ट अतिथियों ने सराहा कदम
    कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक (नाबार्ड) श्री ज्ञानेन्द्र मणि ने ऑनलाइन मार्केटिंग और बेहतर पैकेजिंग पर जोर देते हुए इसे सामूहिक खेती की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। वहीं, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी ने सुझाव दिया कि उत्पादों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और ऐसे केंद्र राज्य के अन्य जिलों में भी खोले जाने चाहिए।
    ब्राजील के मेहमानों ने देखा छत्तीसगढ़ी खेती का दम
    स्थापना दिवस का उत्साह तब और बढ़ गया जब रोटरी क्लब के माध्यम से ब्राजील से आए एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का भ्रमण किया। विदेशी मेहमानों ने यहाँ के ‘चावल जैव विविधता संग्रहण केंद्र’ और ‘कृषि संग्रहालय’ को देखकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपराओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने आर.एच. रिछारिया प्रयोगशाला में छत्तीसगढ़ की उन्नत कृषि प्रणालियों को बारीकी से समझा।
    खास विमोचन और उपस्थिति
    इस खास मौके पर अतिथियों द्वारा ‘छत्तीसगढ़ खेती’ के तिलहन विशेषांक और विश्वविद्यालय के न्यूज लेटर का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभागाध्यक्ष और बड़ी संख्या में किसान समूहों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अंत में डॉ. गौतम रॉय ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

बड़ी बात: अब रायपुर वासियों को सीधे खेतों से निकला शुद्ध सामान और जैविक उत्पाद खरीदने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। विश्वविद्यालय का यह नया शोरूम आधुनिक खेती और ग्रामीण स्वरोजगार के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा।

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