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रायपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’: करोड़ों के ऑनलाइन सट्टा साम्राज्य का भंडाफोड़, 50 लाख जब्त

प्रतीकात्मक चित्र

राजधानी पुलिस ने ऑनलाइन सट्टे के काले कारोबार पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। एक बेहद हाईटेक और संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने चार मुख्य संचालकों को अपनी गिरफ्त में लिया है। इस कार्यवाही ने सट्टा बाजार में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि पुलिस के हाथ न केवल आरोपी लगे हैं, बल्कि 50 लाख रुपये की भारी-भरकम नकद राशि और बैंक बैलेंस भी फ्रीज किया गया है।
म्यूल अकाउंट्स और फर्जी बिलों का ‘मायाजाल’
पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक चौंकाने वाला तरीका (Modus Operandi) सामने आया है। आरोपी सट्टे की काली कमाई को सफेद करने के लिए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खुले खाते) का इस्तेमाल कर रहे थे। गिरोह का नेटवर्क इतना शातिर था कि सट्टे के पैसे को पहले इन डमी खातों में डाला जाता था और फिर उसे ‘बिल खातों’ के जरिए वैध लेनदेन दिखाकर सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की जाती थी।
डिजिटल साक्ष्यों का जखीरा बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से तकनीक और अपराध का गठजोड़ पकड़ा है। मौके से भारी मात्रा में:

  • हाई-एंड स्मार्टफोन और सिम कार्ड
  • विभिन्न बैंकों की पासबुक और चेकबुक
  • दर्जन भर एटीएम कार्ड
  • लेनदेन के डिजिटल दस्तावेज और लैपटॉप बरामद किए गए हैं।
    पैनल आईडी से चलता था सट्टे का ‘कंट्रोल रूम’
    यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय सट्टा एप्स की ‘पैनल आईडी’ लेकर अपना नेटवर्क चला रहा था। इन आईडी के जरिए हजारों ग्राहकों को जोड़ा गया था। पुलिस अब उन डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाल रही है, जो इस नेटवर्क के असली आकाओं तक ले जा सकते हैं।
    दोपहर 1 बजे होगा बड़ा ‘राजफाश’
    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी तो महज मोहरे हो सकते हैं। इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े होने की प्रबल संभावना है। पुलिस आज दोपहर 1:00 बजे एक विस्तृत प्रेस वार्ता आयोजित करने जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरान पुलिस विभाग सट्टे के इस खेल में शामिल कुछ बड़े सफेदपोशों और अन्य राज्यों के लिंक का खुलासा कर सकता है।

ऑनलाइन सट्टे के खिलाफ पुलिस की यह कार्यवाही साइबर अपराध की दुनिया में एक बड़ा संदेश है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे किसी भी लालच भरे गेमिंग एप से दूर रहें, जो न केवल आर्थिक नुकसान बल्कि कानूनी पचड़ों का कारण भी बन सकते हैं।

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