
न्यायधानी के आसमान में अब जल्द ही बड़े विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। बिलासा देवी केवट चकरभाठा एयरपोर्ट के विस्तार की राह में पिछले चार वर्षों से अटका ‘जमीन का रोड़ा’ अब पूरी तरह हट चुका है। भारत सरकार के खाते में 50.64 करोड़ रुपये की राशि जमा होने के साथ ही 290.80 एकड़ अतिरिक्त भूमि का हस्तांतरण सुनिश्चित हो गया है। यह कदम बिलासपुर को विमानन मानचित्र पर एक ‘रीजनल हब’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
- क्यों खास है 4-C श्रेणी का दर्जा?
अभी तक सीमित संसाधनों और छोटे रनवे के कारण यहाँ से केवल छोटे विमानों (ATR-72) का ही संचालन संभव था। लेकिन 4-C श्रेणी में उन्नत होने के बाद यहाँ की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी: - बड़े विमानों की लैंडिंग: अब एयरबस A-320 और बोइंग 737 जैसे बड़े विमान यहाँ से उड़ान भर सकेंगे।
- लंबा रनवे और आधुनिक टर्मिनल: अतिरिक्त जमीन मिलने से रनवे की लंबाई बढ़ाई जाएगी और यात्रियों के लिए अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का निर्माण होगा।
- नाइट लैंडिंग की सौगात: अंधेरे में विमान उतारने की सुविधा (Night Landing) के लिए प्री-कमीशनिंग पूरी हो चुकी है। DGCA की अंतिम मुहर लगते ही फरवरी-मार्च 2026 तक रात में भी हवाई सेवाएं शुरू हो जाएंगी।
जनसंघर्ष की जीत और राजनीतिक इच्छाशक्ति
विधायक अमर अग्रवाल ने इस उपलब्धि को बिलासपुर की जनता की ‘तपस्या का फल’ बताया है। उन्होंने विशेष रूप से जनसंघर्ष समिति के निरंतर प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने हवाई सुविधा की मांग को लेकर वर्षों तक जमीनी लड़ाई लड़ी।
अमर अग्रवाल के अनुसार, केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार के आपसी समन्वय से यह जटिल जमीन विवाद सुलझ पाया है। भाजपा शासन के दौरान विकास की इस गति ने बिलासपुर के औद्योगिक और सामाजिक ढांचे को नई ऊर्जा दी है।
बदलेगी बिलासपुर की तकदीर: व्यापार और पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
हवाई अड्डे का यह विस्तार केवल यात्रा सुगम नहीं करेगा, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक लाभ होंगे: - निवेश और उद्योग: बेहतर कनेक्टिविटी से बड़े निवेशक बिलासपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे सिरगिट्टी, सिलतरा) की ओर आकर्षित होंगे।
- रोजगार के अवसर: एयरपोर्ट ऑपरेशंस, ग्राउंड हैंडलिंग, लॉजिस्टिक्स और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में स्थानीय युवाओं के लिए हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।
- पर्यटन को बढ़ावा: अचानकमार टाइगर रिजर्व और रतनपुर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से विदेशी और घरेलू पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा।
वृहद दृष्टिकोण:
बिलासपुर एयरपोर्ट का 4-C ग्रेड में तब्दील होना केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह बिलासपुर की आर्थिक स्वतंत्रता का नया अध्याय है। जब बड़े शहरों से सीधी कनेक्टिविटी होगी, तब शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में बिलासपुर छत्तीसगढ़ का नेतृत्व करेगा।क्या आप जानते हैं?
4-C श्रेणी का अर्थ है ऐसा रनवे जो 1800 मीटर से अधिक लंबा हो और 36 से 52 मीटर तक के पंखों (Wingspan) वाले विमानों को सुरक्षित संभाल सके।



