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अब नेताओं और अफसरों को नहीं मिलेगा ‘गार्ड ऑफ ऑनर’, खत्म होगी औपनिवेशिक परंपरा: छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला

रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन की शुरुआत की है। प्रदेश में अब दौरों और निरीक्षणों के दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी जाने वाली ‘सलामी गारद’ (गार्ड ऑफ ऑनर) की परंपरा को समाप्त कर दिया गया है। 19 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल की कार्यक्षमता को बढ़ाना और गुलामी की मानसिकता के प्रतीक ‘उपनिवेशवाद’ (Colonial System) के अवशेषों को मिटाना है।।                   क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?  अक्सर देखा जाता था कि जब भी कोई मंत्री या बड़ा पुलिस अधिकारी जिले के दौरे पर होता था, तो पुलिस बल का एक बड़ा हिस्सा उनकी अगवानी और सलामी की तैयारियों में जुट जाता था। इससे न केवल समय की बर्बादी होती थी, बल्कि कानून व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात जवानों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। सरकार का मानना है कि ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ जैसी प्रक्रियाएं ब्रिटिश शासन की देन हैं, जो आज के लोकतांत्रिक ढांचे में अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं

  किसे अब नहीं मिलेगी सलामी? आदेश के लागू होते ही अब राज्य के भीतर सामान्य दौरों, आगमन-प्रस्थान या निरीक्षण के समय निम्नलिखित पदों को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ नहीं दिया जाएगा:

  • प्रदेश के माननीय गृहमंत्री
  • कैबिनेट के समस्त मंत्रीगण
  • पुलिस महानिदेशक (DGP)
  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
    अब ये दिग्गज जब जिलों के दौरे पर जाएंगे, तो पुलिस का कीमती समय वीआईपी प्रोटोकॉल के बजाय सुरक्षा और सेवा में खर्च होगा।
    कहाँ जारी रहेगी यह परंपरा?
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल सामान्य दौरों के लिए है। राष्ट्र और शहीदों के सम्मान से जुड़े कार्यक्रमों में यह परंपरा गौरव के साथ जारी रहेगी। निम्नलिखित मौकों पर औपचारिक सलामी गारद पूर्ववत दी जाती रहेगी:
  • स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व।
  • शहीद पुलिस स्मृति दिवस (21 अक्टूबर)।
  • राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर)।
  • राजकीय समारोह और पुलिस दीक्षांत परेड।
  • संवैधानिक पदों पर बैठे महानुभावों के लिए प्रोटोकॉल के तहत सलामी व्यवस्था यथावत रहेगी।
    व्यवस्था परिवर्तन की ओर एक कदम
    छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग द्वारा जारी यह आदेश राज्य में एक नई कार्य संस्कृति की नींव रख रहा है। जहां एक ओर यह फैसला पुलिस बल को गैर-जरूरी औपचारिकताओं से मुक्त करेगा, वहीं दूसरी ओर ‘जनता के सेवक’ की छवि को और मजबूत करेगा। गृह विभाग के उप सचिव द्वारा हस्ताक्षरित यह निर्देश तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।
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