
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के प्रशासनिक इतिहास में 1 जनवरी 2026 की तारीख एक बड़े बदलाव की गवाह बनने जा रही है। राज्य सरकार ने नए साल के तोहफे के रूप में रायपुर में ‘पुलिस कमिश्नर प्रणाली’ लागू करने का निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश के सफल ‘भोपाल-इंदौर मॉडल’ की तर्ज पर शुरू होने वाली यह व्यवस्था रायपुर को देश के उन चुनिंदा शहरों की कतार में खड़ा कर देगी जहाँ कानून-व्यवस्था का सीधा नियंत्रण पुलिस के हाथों में होता है।। क्या है पुलिस कमिश्नर प्रणाली? :- सामान्य व्यवस्था में जिले की कानून-व्यवस्था का मुखिया जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) होता है। लाठीचार्ज, कर्फ्यू या धारा 144 जैसे बड़े फैसलों के लिए पुलिस को कलेक्टर की अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही ये तमाम ‘मजिस्ट्रेटी शक्तियां’ सीधे पुलिस कमिश्नर (जो ADG या IG रैंक के अधिकारी होंगे) के पास आ जाएंगी। छत्तीसगढ़ इस प्रणाली को अपनाने वाला देश का 18वां राज्य बनने जा रहा है ।
कलेक्टर नहीं, अब कमिश्नर लेंगे ये बड़े फैसले :- इस बदलाव के बाद पुलिस के पास वे अधिकार होंगे जो अब तक केवल सिविल प्रशासन के पास थे।
- धारा 144 और कर्फ्यू: शहर में तनाव की स्थिति में अब पुलिस को फाइलें नहीं घुमानी पड़ेंगी, कमिश्नर खुद कर्फ्यू का फैसला ले सकेंगे।
- धरना-प्रदर्शन: राजनीतिक रैलियों या विरोध प्रदर्शनों की अनुमति अब सीधे पुलिस मुख्यालय से मिलेगी।
- बदमाशों पर नकेल: अपराधियों को ‘जिलाबदर’ करने और ‘गुंडा एक्ट’ या ‘रासुका’ (NSA) लगाने की पावर अब सीधे पुलिस के पास होगी।
- लाइसेंसिंग का नियंत्रण: हथियारों के लाइसेंस जारी करने से लेकर सिनेमाघर, बार और रेस्टोरेंट के संचालन की अनुमति भी पुलिस विभाग तय करेगा।
रायपुर के लिए क्यों जरूरी था यह बदलाव?
आंकड़े बताते हैं कि रायपुर की आबादी पिछले 25 वर्षों में 8 लाख से बढ़कर 25 लाख तक पहुँच गई है। बढ़ती आबादी के साथ अपराध की प्रकृति भी बदली है। वर्तमान में 25 लाख लोगों की सुरक्षा का जिम्मा मात्र 2980 जवानों पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमिश्नरी सिस्टम आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और पुलिस आधुनिक चुनौतियों जैसे साइबर क्राइम और संगठित अपराध से बेहतर ढंग से निपट पाएगी।
कमिश्नर प्रणाली के तहत तकनीकी और कानूनी शक्तियां अधिक होंगी, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अपराधों पर तत्काल कार्रवाई संभव हो सकेगी।
आम जनता को क्या होगा फायदा? - त्वरित न्याय: फाइलों के इधर-उधर घूमने में लगने वाला समय बचेगा, जिससे घटनाओं पर त्वरित रिस्पॉन्स मिलेगा।
- बेहतर ट्रैफिक और सुरक्षा: पुलिस के पास स्वतंत्र वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार होने से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी अधिक प्रभावी होगी।
- अपराधियों में खौफ: जिलाबदर और रासुका जैसी सख्त कार्रवाइयां अब बिना किसी देरी के होंगी, जिससे असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जा सकेगी।
भविष्य की योजना
रायपुर के बाद सरकार की योजना इस सिस्टम को दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर जैसे बड़े औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्रों में भी लागू करने की है। हालांकि, बल की कमी (Force Shortage) एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए सरकार आने वाले समय में बड़े पैमाने पर पुलिस भर्ती की तैयारी भी कर रही है।
निष्कर्ष: रायपुर का यह नया स्वरूप न केवल शहर को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि एक ‘स्मार्ट सिटी’ के लिए जरूरी ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का आधार भी तैयार करेगा। 1 जनवरी से रायपुर की सड़कें और गलियां एक नई और अधिक शक्तिशाली ‘खाकी’ की गवाह बनेंगी।


