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डिजिटल खतरा! क्या आपका ज़िला साइबर सेफ है? छत्तीसगढ़ के 14 साइबर थानों का काम ,नाम और स्थान..

साइबर अपराध… आज के दौर में यह सिर्फ एक डरावना शब्द नहीं, बल्कि एक हकीकत है जो हर स्मार्टफोन और कंप्यूटर यूजर के सिर पर मंडरा रही है। छत्तीसगढ़, जो तेज़ी से डिजिटल हो रहा है, इस खतरे से अछूता नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि इस डिजिटल युद्ध में राज्य कितना तैयार है?
क्या आपने कभी सोचा है कि जब आपके साथ ऑनलाइन फ्रॉड होता है, तो आपकी मदद के लिए कितने और कैसे विशेष थाने काम कर रहे हैं?
- साइबर सुरक्षा की पहली दीवार: 14 विशेष थाने
छत्तीसगढ़ ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक मजबूत ढाँचा तैयार किया है, जिसमें कुल 14 विशेष साइबर पुलिस थाने शामिल हैं।
A. रेंज साइबर थाने (5 नोडल केंद्र)
ये थाने राज्य की साइबर सुरक्षा की मुख्य धुरी हैं। ये पाँच रेंज साइबर थाने 10 अगस्त, 2023 से ही सक्रिय हैं और ये संभाग (Division) स्तर पर बड़े, अंतर्राज्यीय और जटिल साइबर मामलों को संभालते हैं।
- इन थानों के केंद्र हैं: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, सरगुजा (अंबिकापुर), और बस्तर (जगदलपुर)।
- मुख्य काम: ये पूरे रेंज के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करते हैं, तकनीकी मार्गदर्शन देते हैं, और जटिल डिजिटल फॉरेंसिक जाँच करते हैं।
B. जिला स्तरीय साइबर थाने (9 नई सुरक्षा चौकियाँ)
आपके पास मौजूद सरकारी अधिसूचना (दिनांक 21 नवंबर, 2025) के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 9 नए जिला स्तरीय साइबर थानों को स्थापित किया गया है। इन थानों का क्षेत्राधिकार पूरे जिले पर होगा, जिससे आम लोगों की पहुँच साइबर पुलिस तक आसान होगी। - ये 9 थाने निम्नलिखित जिलों में स्थापित किए गए हैं: रायगढ़, कोरबा, राजनांदगांव, कबीरधाम, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, और जशपुर।
- मुख्य काम: इन थानों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच बनाना और सीधे IT Act, 2000 तथा बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) से जुड़े मामलों को दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करना है।

- साइबर थानों का असली काम क्या है?
ये विशेष थाने केवल ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज करने तक सीमित नहीं हैं।
- जाँच और कार्रवाई पर ध्यान:
- ये फिशिंग, लोन ऐप्स, और ओटीपी स्कैम जैसे मामलों में तुरंत वित्तीय लेनदेन को फ्रीज (Freeze) कराते हैं।
- हैकिंग, डेटा चोरी, और सोशल मीडिया अपराधों (मानहानि, ब्लैकमेलिंग) के मामलों में तकनीकी साक्ष्य जुटाने और डिजिटल फॉरेंसिक जाँच करने का काम इन्हीं थानों का है।
- ये थाने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) जैसे नए कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हैं।
- जागरूकता और रोकथाम:
- इनका एक महत्वपूर्ण काम लोगों को साइबर खतरों से बचने के तरीके सिखाना और जन जागरूकता फैलाना है।
- ये बैंक, टेलीकॉम कंपनियों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करते हैं, ताकि अपराधी कहीं भी छिप न सकें।
- चुनौती: संसाधनों की कमी का सच
थानों की संख्या बढ़ाना सराहनीय कदम है, लेकिन इनकी वास्तविक प्रभावशीलता संसाधनों पर निर्भर करती है:
- मानव संसाधन की कमी: सबसे बड़ी चुनौती विशेषज्ञ और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी है। साइबर अपराध की जाँच के लिए पुलिसकर्मियों को नियमित IT प्रशिक्षण, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स और कानूनी अपडेट की सख्त ज़रूरत होती है।
- तकनीकी उपकरण: प्रभावी जाँच के लिए उन्नत डिजिटल फॉरेंसिक लैब, डेटा रिकवरी सॉफ्टवेयर और हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी आवश्यक है, जो कई बार दूरदराज के थानों में एक चुनौती बनी रहती है।
- प्रभावशीलता: क्या साइबर थाने वाकई प्रभावी हैं?
रेंज थानों के शुरू होने के बाद से साइबर फ्रॉड के मामलों में तुरंत कार्रवाई और रिकवरी की गति बढ़ी है। इन थानों ने लाखों रुपये की फ्रॉड राशि को समय पर फ्रीज कराने में सफलता हासिल की है।
9 नए जिला स्तरीय थानों की स्थापना से अब छोटी-छोटी शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जा सकेगा, जिससे मामलों की पेंडेंसी (Pendency) कम होगी और न्याय त्वरित मिलेगा। हालांकि, इनकी असली सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब हर थाने में एक विशेषज्ञ टीम और अत्याधुनिक फॉरेंसिक किट उपलब्ध कराई जाएगी।
पाठकों के लिए सुरक्षा मंत्र
सरकारी सुरक्षा कवच तो बन गया है, लेकिन आपकी व्यक्तिगत डिजिटल सुरक्षा आपके अपने हाथों में है। साइबर अपराध से बचने के लिए इन बातों को हमेशा याद रखें:
- OTPs/Pins/CVV: किसी भी परिस्थिति में किसी बाहरी व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- Unknown Links: अज्ञात, आकर्षक या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- App Permissions: किसी भी ऐप को अनावश्यक या संदिग्ध परमिशन न दें।
- शिकायत: फ्रॉड होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
सवाल यह है कि क्या आपका जिला अब सुरक्षित है? जवाब है, हाँ, पहले से बेहतर। लेकिन पुलिस के साथ-साथ आपको भी अपना ‘साइबर कवच’ मजबूत करना होगा!


