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चंद रुपयों के लालच में कहीं आप तो नहीं बन रहे अपराधी? बिलासपुर पुलिस ने दबोचा ‘म्यूल अकाउंट’ का मास्टरमाइंड

पुलिस से बचने के लिए ट्रेन में ‘कोच अटेंडर’ बनकर करता था फर्जी खातों की सप्लाई, डिजिटल अरेस्ट और क्रिप्टो फ्रॉड के लिए यूपी से लेकर दिल्ली तक फैला था नेटवर्क।.                                                                                                       क्या आप भी 5 से 10 हजार रुपये के कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को दे रहे हैं? अगर हाँ, तो सावधान हो जाइये! यह छोटी सी गलती आपको बड़े साइबर अपराध का हिस्सेदार बना सकती है। बिलासपुर रेंज साइबर पुलिस ने एक ऐसे ही बड़े गिरोह के ‘मुख्य कड़ी’ यानी मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।यह गिरफ्तारी सिर्फ एक अपराधी की नहीं, बल्कि ऑनलाइन ठगी की उस जड़ पर प्रहार है जिसे पुलिस की भाषा में ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) कहा जाता है।.                                                कोच अटेंडर की आड़ में ‘काली कमाई’ का खेल:-पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी दीपक विश्वकर्मा (45 वर्ष), निवासी तोरवा (बिलासपुर) हाल मुकाम रायपुर, बेहद शातिर तरीके से अपना नेटवर्क चला रहा था। पुलिस को चकमा देने के लिए उसने एक नायाब तरीका निकाला— वह ट्रेनों में ‘कोच अटेंडर’ बन गया।.                              अटेंडर की वर्दी की आड़ में वह एक शहर से दूसरे शहर आसानी से आ-जा सकता था। वह बिलासपुर और आसपास के लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता और फिर उन खातों की किट (पासबुक, एटीएम, चेकबुक) लेकर ट्रेन के जरिए यूपी, दिल्ली और भोपाल में बैठे अपने आकाओं (साइबर ठगों) तक पहुँचा देता था।।                                                                              इन बड़े अपराधों में होता था आपके खातों का इस्तेमाल:-रेंज साइबर थाना पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि जिन खातों को दीपक सप्लाई करता था, उनका इस्तेमाल बेहद गंभीर साइबर अपराधों में किया जा रहा था:

  • डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): लोगों को डरा-धमका कर पैसे वसूलना।
  • शेयर ट्रेडिंग और क्रिप्टो फ्रॉड: निवेश के नाम पर ठगी।
  • गूगल रिव्यू और टेलीग्राम टास्क: घर बैठे कमाई का झांसा।
    पुलिस ने बताया कि दीपक खुद रेलवे कोर्ट का एक फरार आरोपी भी था और पिछले 6 महीने से पुलिस के साथ ‘लुका-छिपी’ का खेल खेल रहा था।
    पुलिस का ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’
    इस पूरी कार्रवाई की रूपरेखा पुलिस महानिरीक्षक (IG) बिलासपुर रेंज डॉ. संजीव शुक्ला और पुलिस अधीक्षक (SP) बिलासपुर श्री रजनेश सिंह के सख्त निर्देशन में तैयार की गई थी। उनके मार्गदर्शन में साइबर टीम ने ‘नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल’ के डेटा का विश्लेषण किया और संदिग्ध लेन-देन वाले खातों की कुंडली खंगाली।
    तकनीकी साक्ष्य और मुखबिरों की सूचना पर पता चला कि दीपक बिलासपुर में नए शिकार (खाते) तलाशने आया है। इससे पहले कि वह भाग पाता, पुलिस ने उसे दबोच लिया। उसके खिलाफ रेंज साइबर थाने में 5 अलग-अलग मामले दर्ज हैं।
    इस जांबाज टीम को मिली सफलता
    इस ऑपरेशन को अंजाम तक पहुँचाने में सी.एस.पी. सिविल लाइन श्री निमितेश सिंह के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम ने दिन-रात एक कर दिया।
  • निरीक्षक गोपाल सतपथी: (प्रभारी रेंज साइबर थाना) – जिन्होंने ऑपरेशन को लीड किया।
  • सउनि सुरेश पाठक: जिनकी जांच और सूझबूझ काम आई।
  • प्रधान आरक्षक सैय्यद साजिद और विक्कू सिंह ठाकुर: जिन्होंने मैदानी स्तर पर आरोपी की घेराबंदी में विशेष योगदान दिया।
    पाठकों के लिए चेतावनी: लालच बन सकता है मुसीबत
    यह खबर पढ़ रहे सभी पाठकों से अपील है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या ओटीपी किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें।
  • ठग आपको 5000 से 10000 रुपये का लालच देंगे।
  • लेकिन, उस खाते में ठगी के लाखों रुपये आएंगे।
  • जब पुलिस ट्रैक करेगी, तो दरवाजा आपका खटखटाया जाएगा, असली ठग का नहीं।
    सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। अगर आपके आसपास कोई बैंक खाता मांग रहा है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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