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छत्तीसगढ़ बिजली टैरिफ 2026: क्या सरप्लस बिजली वाले राज्य में लगेगा 20℅ अधिक’महंगाई का करंट’?

छत्तीसगढ़, जिसे देश का ‘पावर हब’ कहा जाता है, इस वक्त एक अजीबोगरीब वित्तीय संकट से जूझ रहा है। राज्य की पावर कंपनियों ने लगभग 6,300 करोड़ रुपये के भारी-भरकम घाटे का दावा किया है। फरवरी में हुई जनसुनवाई के बाद से राज्य नियामक आयोग इस पहेली को सुलझाने में जुटा है कि आखिर इस घाटे की भरपाई कैसे हो, ताकि आम आदमी की जेब पर कम से कम बोझ पड़े।

आंकड़ों का मायाजाल: मुनाफा या घाटा?

कंपनी द्वारा पेश किए गए वित्तीय आंकड़ों ने विशेषज्ञों को भी उलझन में डाल दिया है। आंकड़ों पर गौर करें तो एक विरोधाभास साफ नजर आता है:

  • अनुमानित राजस्व: ₹26,216 करोड़
  • अनुमानित खर्च: ₹25,460 करोड़

गणित के हिसाब से कंपनी को लाभ में होना चाहिए, लेकिन पिछले वर्षों के संचित घाटे (Revenue Gap) ने पूरी तस्वीर बदल दी है। पावर कंपनी का तर्क है कि पुराने घाटे को मिलाकर उनकी कुल वित्तीय आवश्यकता 32,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

क्या आपकी बिजली 20% तक महंगी हो जाएगी?

यदि नियामक आयोग पावर कंपनी के दावों पर मुहर लगा देता है, तो प्रदेश में बिजली की दरों में 20 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि देखी जा सकती है।इसकी तुलना पिछले साल से करें, तो स्थिति की गंभीरता समझ आती है। पिछले वर्ष मात्र 500 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज था, जिसके कारण दरों में केवल 2% की मामूली बढ़ोतरी हुई थी। इस बार घाटे का आंकड़ा 12 गुना ज्यादा है, जिससे आयोग के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

देरी का कारण और जून की डेडलाइन

आमतौर पर नई बिजली दरें 1 अप्रैल से लागू हो जाती हैं। हालांकि, इस साल आयोग फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। सभी पहलुओं की सूक्ष्म जांच की जा रही है ताकि मध्यम और निम्न वर्ग को बचाया जा सके। माना जा रहा है कि जून 2026 तक नई दरों का अंतिम ऐलान हो सकता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: छत्तीसगढ़ बनाम अन्य राज्य

छत्तीसगढ़ में बिजली की दरें पड़ोसी राज्यों के मुकाबले हमेशा से प्रतिस्पर्धी रही हैं। नीचे दिए गए तुलनात्मक बिंदुओं से समझें कि स्थिति क्या है:

  1. उत्पादन लागत: छत्तीसगढ़ कोयला समृद्ध राज्य है, जिससे यहां बिजली उत्पादन की लागत अन्य राज्यों (जैसे दिल्ली या पंजाब) की तुलना में कम है।
  2. टैरिफ संरचना: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कमर्शियल और घरेलू दरें छत्तीसगढ़ की वर्तमान दरों से काफी अधिक हैं।
  3. सरप्लस का लाभ: एक बिजली सरप्लस राज्य होने के नाते, छत्तीसगढ़ दूसरे राज्यों को बिजली बेचता है। लेकिन अगर घरेलू घाटा बढ़ता है, तो यह ‘सरप्लस’ का टैग आम उपभोक्ताओं के लिए बेमानी हो जाएगा।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है संकेत?

बिजली दरों में बढ़ोतरी अब लगभग तय मानी जा रही है, सवाल सिर्फ ‘कितनी’ का है। अगर आयोग कंपनी के 6,300 करोड़ के घाटे को पूरी तरह स्वीकार करता है, तो यह छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक होगी। फिलहाल, प्रदेश की जनता की नजरें जून में आने वाले आयोग के फैसले पर टिकी हैं।

नोट: यह लेख वर्तमान वित्तीय दावों और जनसुनवाई के तथ्यों पर आधारित है। आधिकारिक दरों की पुष्टि आयोग की वेबसाइट पर जून में की जा सकेगी।

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