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बस्तर की सल्फी अब नए अवतार में: ‘बस्तर बीयर’ को ग्लोबल पहचान दिलाने की तैयारी, हर्षवर्धन का शानदार नवाचार

बस्तर के जंगलों की शान और वहां की संस्कृति की धड़कन मानी जाने वाली ‘सल्फी’ अब केवल एक पारंपरिक पेय नहीं रहेगी। बस्तर के एक युवा नवाचारी, हर्षवर्धन बाजपेयी ने अपनी वैज्ञानिक सोच से सल्फी की सूरत बदलने का बीड़ा उठाया है। उनके इस अनूठे प्रयोग को राज्य स्तर पर बड़ी पहचान मिली है, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उन्हें ‘इनोवेशन महाकुंभ 1.0’ में ‘न्यू इनोवेशन अवार्ड’ से सम्मानित किया।

क्यों खास है सल्फी? जिसे कहते हैं ‘बस्तर बीयर’

सल्फी, बस्तर के आदिवासी समाज का अभिन्न हिस्सा है। यह ‘कैरियोटा यूरेन्स’ (ताड़ की एक प्रजाति) के पेड़ से निकलने वाला प्राकृतिक रस है। ताजा होने पर इसका स्वाद नारियल पानी की तरह मीठा और स्फूर्तिदायक होता है। हालांकि, कुछ घंटों बाद प्राकृतिक किण्वन (Fermentation) की वजह से यह हल्का नशीला हो जाता है, जिसके कारण इसे ‘बस्तर बीयर’ के नाम से भी जाना जाता है। बस्तर के सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सवों में इसका स्थान सर्वोपरि है।

चुनौती थी ‘सेल्फ लाइफ’, हर्षवर्धन ने निकाला समाधान

हर्षवर्धन बाजपेई

सल्फी के साथ सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इसे पेड़ से उतारने के कुछ समय बाद ही यह खराब होने लगती थी या नशीली हो जाती थी। इसे संरक्षित करना नामुमकिन माना जाता था। हर्षवर्धन बाजपेयी ने “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से इस समस्या का हल खोज निकाला है।
उन्होंने सल्फी की सेल्फ लाइफ (सुरक्षित रखने की अवधि) बढ़ाने में सफलता पाई है। उनके इस प्रयोग से सल्फी के प्राकृतिक पोषक गुणों और मूल स्वाद को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। अब इसे सिर्फ एक मादक पेय नहीं, बल्कि एक ‘हेल्थ ड्रिंक’ के रूप में देखा जा रहा है।

सल्फी को जीआई टैग दिलाने का बड़ा सपना

हर्षवर्धन का लक्ष्य केवल पुरस्कार जीतना नहीं है, बल्कि बस्तर की इस विरासत को वैश्विक बाजार तक पहुँचाना है। वे चाहते हैं कि:

  • सल्फी को एक नेचुरल हेल्थ ड्रिंक के रूप में पहचान मिले।
  • भविष्य में बस्तर की सल्फी को जीआई टैग (GI Tag) प्राप्त हो।
  • ग्रामीण परिवारों की आजीविका में सुधार हो और बस्तर के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिकें।

आदिवासी अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान

अगर सल्फी को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित कर बाजार में उतारा जाता है, तो यह बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। पेट की समस्याओं में लाभकारी माने जाने वाले इस पेय को यदि सही पैकेजिंग और गुणवत्ता के साथ पेश किया गया, तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के बड़े शहरों में बस्तर की सल्फी का स्वाद गूंजेगा।

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