
बिलासपुर से बड़ी खबर

बिलासपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पदस्थ स्टेनो बृजबिहारी साहू और लिपिक किंड़ो के खिलाफ करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले और शासन के आदेश दबाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्यवाही की मांग करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश को विस्तृत शिकायत आवेदन भेजा है।
जांच समिति की रिपोर्ट दबाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार तत्कालीन जांच समिति, जिसमें डीएसपी अजीत पटेल और मुख्य लिपिक रामपाल खरसान शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में एक पुलिस अधिकारी को एसआई (अस्थायी) से पदावनत कर एएसआई (अस्थायी) करने की अनुशंसा की थी।आरोप है कि स्टेनो बृज बिहारी साहू ने इस आदेश को फाइलों में ही दबाकर सेवा अभिलेखों में दर्ज नहीं होने दिया, जिससे संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रस्तावित विभागीय कार्यवाही ठंडे बस्ते में चली गई
यात्रा भत्ते में 3–4 करोड़ की हेराफेरी
शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच एसपी कार्यालय के लगभग 60–70 कर्मचारियों के टीए/डीए (यात्रा भत्ता) में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। फर्जी बिल, जालसाजी और कागजात में हेराफेरी के जरिए सरकारी खजाने को करीब 3–4 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है, जिस पर थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 74/2018, धारा 409, 420, 467, 471 भादंवि के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।
मेडिकल बिलों में करोड़ों का कथित घोटाला
इसी शिकायत में लिपिक राजकुमारी किड़ो पर कर्मचारियों के मेडिकल बिलों की पासिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मेडिकल प्रतिपूर्ति की आड़ में 4–5 करोड़ रुपये तक की अनियमित स्वीकृतियां दी गईं, जिसमें वास्तविक खर्च से कहीं अधिक राशि निकलवाई गई और कई संदिग्ध बिलों को भी मंजूरी दी गई।
कार्यवाही की मांग तेज, विभाग सवालों के घेरे में
शिकायत में दोनों कर्मचारियों पर शासन के कई महत्वपूर्ण आदेशों को जानबूझकर दबाने, वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने और विभागीय जांचों को प्रभावित करने के आरोप भी शामिल हैं।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च न्यायालय और पुलिस विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं, क्योंकि आरोप सही पाए जाने पर यह मामला छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में सामने आए सबसे बड़े घोटालों में से एक माना जा सकता है।



