बिलासपुर सायबर थाना ने ₹73 लाख की ठगी का किया पर्दाफाश, पीएम समृद्धि योजना के नाम पर ठगने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो सदस्य बिहार से गिरफ्तार

बिलासपुर, छत्तीसगढ़।
बिलासपुर रेंज सायबर थाना ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) के एक सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश किया है। प्रधानमंत्री समृद्धि योजना (PM Samridhi Yojana) के तहत कम ब्याज पर लोन दिलाने का लालच देकर एक मेडिकल व्यवसायी से ₹73 लाख से अधिक की ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह के 02 मुख्य सदस्यों को बिहार के वैशाली जिले से गिरफ्तार किया गया है।
💰 कैसे दिया गया ठगी को अंजाम?
- शिकार: प्रार्थी राजेश पाण्डेय, नेचर सिटी, सकरी (बिलासपुर) निवासी एक मेडिकल व्यवसायी थे।
- झाँसा: आरोपियों ने खुद को श्रीराम सिटी यूनियन फायनेंस लिमिटेड, मुंबई का अधिकारी बताया। उन्होंने व्यवसायी को पीएम समृद्धि योजना के तहत 50 लाख रुपये का लोन 30 प्रतिशत की छूट पर दिलाने का लालच दिया।
- धोखाधड़ी: 12.02.2024 से 29.09.2025 के बीच, ग्रिजेश त्रिवेदी और अन्य नामों का उपयोग कर विभिन्न मोबाइल नंबरों से कॉल किए गए। इस दौरान, झाँसे में लेकर व्यवसायी से किश्तों में कुल ₹73,23,291/- (तिरत्तर लाख तेईस हजार दो सौ इक्यानवे रुपये) की बड़ी राशि ठग ली गई।
🛡️ सायबर थाना की त्वरित और संगठित कार्यवाही
पुलिस महानिरीक्षक (बिलासपुर रेंज) डॉ. संजीव शुक्ला (भा.पु.से.) के निर्देशन और पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) के मार्गदर्शन में, रेंज सायबर थाना बिलासपुर की विशेष टीम ने इस संगठित अपराध को गंभीरता से लिया। - तकनीकी जाँच: टीम ने सायबर क्राईम रिपोर्टिंग पोर्टल की रिपोर्ट, ठगी की रकम प्राप्त करने वाले बैंक खातों की जानकारी, ऑनलाइन लेन-देन और अन्य तकनीकी पहलुओं को खंगाला।
- ठिकानों की पहचान: गहन जाँच के बाद, पता चला कि अपराधी बिहार के वैशाली जिले के गढ़वाल कनौली गाँव के निवासी हैं।
- गिरफ्तारी: निरीक्षक रजनीश सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम को बिहार रवाना किया गया। लगातार दो दिनों की गहन पड़ताल के बाद, स्थानीय पुलिस के सहयोग से दोनों आरोपियों को धर दबोचा गया।
🧑⚖️ गिरफ्तार आरोपी और उनका ‘मोडस ऑपरेंडी’
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकास कुमार उर्फ विक्रम सिंह (28 वर्ष) और अमन कुमार सिंह उर्फ पीयूष के रूप में हुई है, दोनों वैशाली (बिहार) के निवासी हैं।
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए: - वे दिल्ली में किराये के मकान में रहकर अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर यह गोरखधंधा चलाते थे।
- ठगी के लिए वे फर्जी सिम कार्डों का इस्तेमाल करते थे।
- ठगी की रकम निकालने के लिए उन्होंने अपने और अन्य लोगों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धारा 111 बीएनएस के तहत सख्त कार्यवाही की गई है।
साइबर थाना के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अभी अन्य आरोपियों और ठगी की गई रकम के संबंध में विस्तार से पूछताछ की जा रही है। ऐसे मामलों में आम जनता को अज्ञात कॉल या कम ब्याज पर लोन देने का लालच देने वाले किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करने की सलाह दी जाती है।
यह गिरफ्तारी साइबर अपराधियों के खिलाफ बिलासपुर रेंज की पुलिस की एक बड़ी जीत है, जो दिखाती है कि अपराधी देश में कहीं भी छिपे हों, कानून के हाथ उन तक जरूर पहुँचेंगे।



