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बीजापुर एनकाउंटर: बस्तर में लहू और बारूद का सनसनीखेज दिन, 12 नक्सली ढेर, 3 जवान शहीद

छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग एक बार फिर लहू-लुहान हो गया। बीजापुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 12 नक्सलियों को मार गिराया है, लेकिन इस बहादुरी की कीमत 3 जांबाज जवानों की शहादत से चुकानी पड़ी है।
क्या हुआ आज सुबह?
यह घटना आज सुबह लगभग 9 बजे उस समय हुई जब डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और कोबरा (CoBRA) की एक संयुक्त टीम पश्चिमी बस्तर डिवीजन के घने जंगलों में नक्सल विरोधी ऑपरेशन चला रही थी।
जवान जैसे ही बीजापुर-दंतेवाड़ा के सीमावर्ती क्षेत्र में पहुँचे, नक्सलियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। यह मुठभेड़ रुक-रुक कर लंबे समय तक चली, जिसे बस्तर के इतिहास की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
शहादत और सफलता: दोनों की दास्तान
ऑपरेशन के बाद, सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से 12 वर्दीधारी नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। मारे गए नक्सलियों में कुछ उच्च-कैडर के नेता भी शामिल हो सकते हैं, जिसकी पुष्टि अभी की जानी बाकी है। घटनास्थल से एसएलआर और .303 जैसी राइफलें भी भारी मात्रा में जब्त की गई हैं।
हालांकि, इस बड़ी सफलता के बीच, हमने DRG बीजापुर के तीन जाँबाज बेटों को खो दिया। प्रधान आरक्षक मोनू वडाड़ी, आरक्षक दुकारू गोंडे, और जवान रमेश सोड़ी ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत को पूरा राष्ट्र सलाम कर रहा है।
ऑपरेशन क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
यह संयुक्त ऑपरेशन बस्तर में नक्सलियों पर आक्रामक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) सुंदरराज पी. के अनुसार, सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि नक्सली अब सुरक्षित ठिकाने नहीं ढूंढ पाएंगे। इस बड़े नुकसान से नक्सलियों के कमर पर गहरा प्रहार हुआ है।
इलाके में फिलहाल सघन तलाशी अभियान जारी है।

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