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इंटरनेशनल गैंगस्टर का गुर्गा  आएगा रायपुर: अमन साव गैंग का ‘ऑपरेटर’ मयंक अजरबैजान से धराया, 10 दिसंबर को होगी ‘बड़ी’ गिरफ्तारी!

  • ब्रेकिंग न्यूज़! रायपुर में जुलाई 2024 के तेलीबांधा पीआरए ग्रुप शूटआउट केस में एक बड़ा मोड़ आ गया है। गैंगस्टर अमन साव के सबसे भरोसेमंद और इंटरनेशनल नेटवर्क को संभालने वाले गुर्गे मयंक सिंह उर्फ सुनील राणा को 10 दिसंबर को रायपुर पुलिस प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आ रही है।
    ✈️ अजरबैजान से हुई गिरफ्तारी, जेल में था बंद
    वह गैंगस्टर जिसका नाम लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से जुड़ चुका है, उसे इंटरपोल की मदद से अजरबैजान में पकड़ा गया था। यह साफ़ करता है कि यह गुर्गा देश के बाहर बैठकर ही अमन साव के गैंग को ऑपरेट कर रहा था और इंटरनेट मीडिया के ज़रिए रायपुर में धमकियाँ दे रहा था। वर्तमान में यह आरोपी झारखंड की जेल में बंद है।
    🔥 पीआरए शूटआउट: वह जिसने कहा था ‘गोली चलेगी और निशाना नहीं चूकेगा’
  • जुलाई 2024 में तेलीबांधा के पीआरए ग्रुप दफ्तर के बाहर हुई फायरिंग मामले में मयंक सिंह प्रमुख आरोपी है। पुलिस जांच में यह सामने आया कि यह वही गुर्गा है जिसने मई 2024 में ईमेल के ज़रिए रायपुर में हमला करने की धमकी दी थी। उसका सीधा मैसेज था: “गैंग में शूटरों की कमी नहीं है, मांग पूरी नहीं हुई तो गोली चलेगी और निशाना नहीं चूकेगा।”
  • इस धमकी के दो महीने बाद 13 जुलाई 2024 को शूटआउट हुआ, जिसमें अमन साव के शूटरों ने फायरिंग की थी।
    👑 एनकाउंटर के बाद संभाल ली थी गैंग की कमान
    गैंगस्टर अमन साव के एनकाउंटर (मार्च 2025) में मारे जाने के बाद इस गैंग की कमान मयंक सिंह ने संभाल ली थी। पुलिस के अनुसार, वह सिर्फ़ अमन साव का करीबी नहीं था, बल्कि इंटरनेशनल गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भी नज़दीकी माना जाता है और दोनों के नेटवर्क के बीच एक अहम कड़ी के रूप में काम करता था।
    🔒 क्या उगलेगा मयंक? पुलिस करेगी बड़ी पूछताछ
    इस मामले में रायपुर पुलिस ने अमन साव और उसके एक दर्जन से अधिक गुर्गों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। अब मयंक सिंह को प्रोडक्शन वारंट पर रायपुर लाकर उसकी गिरफ्तारी और गहन पूछताछ की जाएगी।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मयंक सिंह की गिरफ्तारी से न सिर्फ़ पीआरए शूटआउट केस की परतें खुलेंगी, बल्कि लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव नेटवर्क के रायपुर कनेक्शन और देश के बाहर से चल रहे गैंग के ऑपरेशन के बारे में भी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।
    अमन साव को अक्टूबर 2024 में रायपुर लाया गया था, लेकिन मार्च 2025 में झारखंड वापस ले जाते समय भागने की कोशिश के दौरान वह जवाबी कार्रवाई में मारा गया था।
फाइल फोटो
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