नीचता पर उतरे ट्रम्प,भारत को ड्रग्स तश्करी करने वाले देशों में किया शामिल।

क्या भारत सच में दुनिया में ड्रग्स तस्करी का एक बड़ा केंद्र बन गया है? जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को ‘ड्रग्स’ तस्करी करने वाले देशों की सूची में शामिल किया है, यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है। ट्रंप के इस फैसले ने दुनियाभर में हलचल मचा दी है, खासकर तब जब भारत लगातार ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई को मजबूत कर रहा है। तो, आइए जानते हैं कि इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी क्या है और इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा।
‘ड्रग्स किंगपिन’ की सूची में भारत का नाम!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसका नाम ‘प्रेसिडेंशियल डिटरमिनेशन’ है। इस रिपोर्ट में 23 देशों के नाम हैं, जिन्हें अमेरिका ने अवैध ड्रग्स के उत्पादन और तस्करी का केंद्र माना है। इस सूची में भारत के साथ-साथ चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और म्यांमार जैसे देश भी शामिल हैं। अमेरिका का मानना है कि ये देश उसके नागरिकों के लिए ड्रग्स से संबंधित बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं।
यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि भारत हमेशा से ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई में अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी रहा है।
ड्रग्स तस्करी के खिलाफ भारत की कड़ी मेहनत को नजरअंदाज क्यों?
ट्रंप की रिपोर्ट में भारत के खिलाफ की गई टिप्पणी के बावजूद, एक अच्छी बात यह है कि इसी रिपोर्ट में भारत द्वारा ड्रग्स की तस्करी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना भी की गई है। भारतीय एजेंसियां, जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), लगातार बड़े-बड़े ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश कर रही हैं। पड़ोसी देशों से आने वाले ड्रग्स की खेप को जब्त किया जा रहा है और तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा जा रहा है। भारत के प्रयासों को दुनिया ने सराहा भी है।
इसके बावजूद, भारत को ‘ड्रग ट्रांजिट’ देश यानी ड्रग्स के पारगमन मार्ग के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इसका मतलब यह है कि भले ही भारत में ड्रग्स का उत्पादन ज्यादा न होता हो, लेकिन यहां की भौगोलिक स्थिति के कारण यह देश एशिया और यूरोप के बीच ड्रग्स की तस्करी के लिए एक प्रमुख रास्ता बन गया है।
भारत के लिए क्या हैं चुनौतियाँ?
ट्रंप के इस फैसले का भारत पर सीधा असर तो नहीं पड़ेगा, लेकिन यह एक तरह का चेतावनी संकेत जरूर है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह ड्रग्स के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी और अमेरिका के साथ इस मुद्दे पर मिलकर काम करेगी।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि ड्रग्स की समस्या कितनी गंभीर है और इसे हल करने के लिए सभी देशों को एकजुट होना होगा। भारत को अब अपनी सीमाओं और भी मजबूत करनी होंगी ताकि इस तरह की सूची में दोबारा उसका नाम न आए।



