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दर्द से कराहता रहा तेंदुआ, नींद में ग़ाफ़िल रहा वन विभाग: लापरवाही की कीमत एक जिंदगी( इंद्रावती टाइगर रिजर्व)

घायल होकर उपचार के आभाव में मृत हुआ तेंदुआ


बीजापुर, छत्तीसगढ़: बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व के भैरमगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में वन विभाग की घोर लापरवाही ने एक तेंदुए की जान ले ली. माटवाड़ा नेशनल हाईवे के पास चार दिन तक दर्द से कराह रहे तेंदुए की सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे एक पालतू कुत्ते की आवाज समझकर नजरअंदाज कर दिया. जब तक वन विभाग जागा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी—तेंदुए का शव पहाड़ी इलाके में मिला.


यह घटना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है. ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले चार दिनों से घनी झाड़ियों से किसी जानवर के दर्द भरी आवाजें सुन रहे थे. उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी वन विभाग को दी, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया. अगर समय पर कार्रवाई हुई होती और घायल तेंदुए को इलाज मिला होता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी.


वन विभाग की टीम ने घटनास्थल से तेंदुए के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. इंद्रावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर संदीप बलगा ने दावा किया है कि तेंदुए के शव पर आपसी संघर्ष के निशान मिले हैं और घाव कुछ दिन पुराने हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में तेंदुओं की आवाजाही आम है.


लेकिन, सवाल यह है कि जब ग्रामीणों ने बार-बार इसकी सूचना दी, तो वन विभाग ने इतनी देरी क्यों की? क्या वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों पर है? इस घटना ने न सिर्फ वन विभाग की लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि वन्यजीवों के प्रति उनकी संवेदनहीनता को भी दर्शाया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भले ही मौत की वजह सामने आ जाएगी, लेकिन वन विभाग की निष्क्रियता ने जिस तरह एक दुर्लभ जानवर की जान ली, उस पर जवाबदेही तय होना बाकी है.

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