
रायपुर: नवा रायपुर में जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी आधिकारिक रोक के बावजूद बड़े पैमाने पर विवादास्पद भूमि सौदों का खुलासा हुआ है। इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, और सबकी निगाहें अब एक नए ‘नेक्सस’ पर टिकी हैं।
ईडी की रडार पर कांग्रेस नेता
पिछले तीन साल से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से बच रहे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बीते एक साल में सबसे ज़्यादा जमीनें खरीदी हैं। इन खरीदों ने उन्हें शक के घेरे में ला दिया है। सूत्रों की मानें तो ये जमीनें नवा रायपुर के मेफेयर होटल के आसपास खरीदी गई हैं।
भाजपा-कांग्रेस की ‘समधी’ जोड़ी का खुलासा
इस कथित घोटाले में अकेले कांग्रेस वरिष्ठ नेता का नाम नहीं है। एक भाजपा के पूर्व पद धारी वरिष्ठ नेता का नाम भी सामने आया है। बताया जाता है कि ये दोनों नेता आपस में ‘सामाजिक समधी’ हैं, और भूपेश बघेल की सरकार के कार्यकाल के दौरान इन दोनों की मिलीभगत से करीब 100 एकड़ जमीन की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त हुई।
अधिकारियों की मिलीभगत और ‘राजमार्ग’ का निर्माण
यह मामला सिर्फ नेताओं तक सीमित नहीं है। सूत्रों का दावा है कि इस घोटाले में अधिकारियों की सांठगांठ भी है। इन विवादित जमीनों तक आसान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष सड़क का निर्माण किया जा रहा है। यही नहीं, खरीदी गई जमीन पर रातों-रात मकानों का निर्माण भी शुरू हो गया है, जो इस सौदे की जल्दबाजी और संदिग्ध प्रकृति को दिखाता है।
क्या यह सिर्फ ‘सामाजिक समधी’ का मामला है या फिर यह ‘राजनेतिक समधी’ के गठजोड़ का एक बड़ा खेल है? क्या भ्रष्टों के इस परिवार पर ED शिकंजा कसेगी? समय ही बताएगा।



