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एमबीबीएस काउंसलिंग: पात्रता और आवंटन सूची में अंतर क्यों? दूसरी काउंसलिंग 27 अगस्त को

छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस काउंसलिंग को लेकर अक्सर छात्रों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है, खासकर जब पात्रता सूची (Eligibility List) और आवंटन सूची (Allotment List) में अंतर दिखता है। इस अंतर के पीछे क्या वजह है, इस पर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान शिक्षा निदेशालय (CGDME) ने विस्तार से स्पष्टीकरण दिया है।


नियमों पर आधारित है पूरा प्रोसेस
CGDME के अनुसार, यह अंतर पूरी तरह से नियमों और प्रक्रियाओं पर आधारित है। 26 जुलाई 2025 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी की गई पात्रता सूची केवल छात्रों द्वारा फॉर्म में भरे गए “पात्रता राज्य” (Eligibility State) पर आधारित होती है। इसमें डोमिसाइल सर्टिफिकेट (निवास प्रमाण पत्र) शामिल नहीं होता।


इसके विपरीत, राज्य अपनी मेरिट लिस्ट आवेदकों द्वारा जमा किए गए प्रमाण पत्रों और राज्य के विशिष्ट नियमों के आधार पर बनाता है। यही कारण है कि दोनों सूचियों में अंतर दिखाई देता है। कई बार NTA की सूची में उन छात्रों के नाम होते हैं जो राज्य कोटे के लिए आवेदन ही नहीं करते।
कुछ खास उदाहरणों से समझें

  • अगर कोई छात्र NEET के फॉर्म में महाराष्ट्र को अपना “पात्रता राज्य” भरता है, लेकिन उसने 12वीं छत्तीसगढ़ से पास की है और वह राज्य के डोमिसाइल नियमों को पूरा करता है, तो वह छत्तीसगढ़ की मेरिट लिस्ट में शामिल हो सकता है।
  • कई छात्र पढ़ाई के लिए कोटा (राजस्थान) या अन्य राज्यों में रहते हैं और फॉर्म में वहीं का पता भर देते हैं। लेकिन, अगर वे मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, तो अपने निवास प्रमाण पत्र के आधार पर वे यहां की काउंसलिंग के लिए पात्र होते हैं।
  • केंद्र सरकार या रक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों के लिए भी ऐसा ही होता है, क्योंकि उनके बार-बार स्थानांतरण होते रहते हैं।

आरक्षण और प्राइवेट कॉलेजों की स्थिति
CGDME ने आरक्षण को लेकर भी स्थिति साफ की है। कई छात्र फॉर्म में केंद्रीय OBC श्रेणी भर देते हैं, जबकि वे राज्य की ओबीसी सूची में नहीं होते। ऐसे में उन्हें अनारक्षित श्रेणी (Unreserved Category) में मौका दिया जाता है। इसी तरह, यदि किसी छात्र के पास आवेदन के समय SC/ST प्रमाण पत्र नहीं है, लेकिन काउंसलिंग के दौरान वह इसे प्रस्तुत करता है और छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होने की शर्त पूरी करता है, तो उसे पात्र माना जाता है।

इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की काउंसलिंग में दूसरे राज्यों के छात्र भी मैनेजमेंट या NRI कोटे से आवेदन कर सकते हैं। इसलिए, अगर किसी का नाम NTA की सूची में नहीं है, तो भी उसे पंजीकरण से नहीं रोका जा सकता।


आवंटन के बाद की प्रक्रिया
जब किसी छात्र को सीट आवंटित हो जाती है, तो उसे अपने सभी जरूरी प्रमाण पत्र पेश करने होते हैं। स्क्रूटनी अधिकारी इन दस्तावेजों की जांच करते हैं। प्रवेश के नियमों के अनुसार, प्रवेश से एक दिन पहले तक जारी किए गए प्रमाण पत्र मान्य होते हैं। यदि कोई प्रमाण पत्र अमान्य पाया जाता है, तो छात्र को अपात्र घोषित कर दिया जाता है और उसका आवंटन रद्द हो जाता है।


पहले चरण का सफल समापन
छत्तीसगढ़ में NEET UG 2025 के पहले चरण की काउंसलिंग 23 अगस्त को पूरी हो गई है। इस चरण में कुल 1988 सीटों का आवंटन किया गया। इनमें से एमबीबीएस की 1534 सीटों में से 1396 पर और बीडीएस की 454 सीटों में से 284 पर प्रवेश सुनिश्चित हुआ।
CGDME ने बताया कि पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ हो रही है। काउंसलिंग का दूसरा चरण 27 अगस्त से शुरू होगा।

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