“साइबर शील्ड” ने किया बड़ा खुलासा: रायपुर में 3 बैंक अधिकारी गिरफ्तार, ‘म्यूल बैंक’ खातों का रैकेट ध्वस्त

रायपुर: साइबर अपराधियों के खिलाफ रायपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन साइबर शील्ड’ एक बड़ी सफलता लेकर आया है। पुलिस ने ‘म्यूल बैंक’ खातों के रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन बड़े बैंकों के अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी खातों के लिए KYC (अपने ग्राहक को जानें) नियमों की अनदेखी की और दलालों से पैसे लेकर हजारों फ्रॉड बैंक खाते खोले।
क्या है मामला?
पुलिस को साइबर क्राइम पोर्टल पर ‘म्यूल बैंक’ खातों की रिपोर्ट मिली थी, जिसके बाद रेंज पुलिस महानिरीक्षक श्री अमरेश मिश्रा ने एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम को फर्जी खाते खोलने और उनका संचालन करने वाले सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। जांच के दौरान टिकरापारा, सिविल लाइन और गुढियारी थानों में केस दर्ज किए गए।
जांच में सामने आया कि एक्सिस बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और रत्नाकर बैंक (RBL) के अधिकारियों ने बैंक के नियमों का पालन नहीं किया। उन्होंने बैंक खाते खोलने के लिए दलालों से पैसे लिए और बदले में उन्हें बिना सही दस्तावेजों के खाते खोलने की छूट दी। इसी वजह से इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
कौन हैं गिरफ्तार अधिकारी?
पुलिस ने पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीन बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है:
- अभिनव सिंह (32), एक्सिस बैंक
- प्रवीण वर्मा (37), इंडियन ओवरसीज बैंक
- प्रीतेश शुक्ला (32), रत्नाकर बैंक (RBL)
इन सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई साइबर क्राइम के खिलाफ पुलिस की एक बड़ी जीत मानी जा रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उन लोगों पर निशाना साधती है जो अपराध की नींव रखते हैं।
‘म्यूल अकाउंट’ क्या होता है?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से अर्जित धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए करते हैं। ये खाते अक्सर ऐसे लोगों के नाम पर खोले जाते हैं जो या तो अनजाने में या पैसों के लालच में आकर अपने खाते का उपयोग अपराधियों को करने देते हैं। इस मामले में बैंक अधिकारियों ने खुद दलालों के साथ मिलकर इन खातों को खोलने में मदद की।




