
रायगढ़, छत्तीसगढ़: रायगढ़ की धरती से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय पत्रकारिता जगत में भूचाल ला दिया है, बल्कि देश भर के मीडिया गलियारों में हलचल मचा दी है। रायगढ़ प्रेस क्लब ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अदानी समूह के विज्ञापनों का पूर्ण बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है! लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कलम के सिपाहियों को यह कठोर निर्णय लेना पड़ा?
क्या है बहिष्कार की असली वजह?:-
मामला सिर्फ विज्ञापनों के बहिष्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे की कहानी कहीं ज़्यादा गहरी और चिंताजनक है। रायगढ़ प्रेस क्लब के अध्यक्ष हेमंत थवाईत ने सीधे तौर पर पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और उन्हें जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है। यह आरोप सीधे-सीधे अदानी समूह से जुड़े “गुर्गों” और उनके स्थानीय प्रबंधन पर लगाए गए हैं। सोचिए, जब पत्रकार, जो समाज का आईना होते हैं, अपनी जान को खतरे में महसूस करने लगें, तो स्थिति कितनी गंभीर होगी!
थवाईत जी ने साफ़ शब्दों में कहा है कि जब तक अदानी कंपनी के कथित “गुर्गों” और स्थानीय प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, रायगढ़ के पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे। यह बहिष्कार केवल विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अदानी समूह से संबंधित किसी भी खबर को अपने मीडिया में स्थान न देना भी शामिल है। यह एक बड़ा और साहसिक कदम है, जो बताता है कि पत्रकारों का गुस्सा सातवें आसमान पर हैं।
आखिर क्यों सुलग उठी आक्रोश की चिंगारी?
यह पहली बार नहीं है जब बड़े कॉर्पोरेट घरानों और स्थानीय लोगों या मीडिया के बीच तनाव की खबरें आई हैं। रायगढ़ में अदानी समूह की मौजूदगी काफी समय से है और उनके प्रोजेक्ट्स को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में पत्रकारों को सीधे धमकी दिए जाने का आरोप एक बड़ा मुद्दा बन गया है। यह घटना प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। क्या अब पत्रकारों को अपना काम करने के लिए भी डर-डर कर जीना पड़ेगा?
आगे क्या होगा?
रायगढ़ प्रेस क्लब का यह कदम निश्चित रूप से अदानी समूह पर दबाव बनाएगा। अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले पर अदानी समूह की क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या वे पत्रकारों के आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण देंगे? क्या धमकी देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी? या यह मामला और गरमाएगा?
यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। रायगढ़ के पत्रकार अपनी एकजुटता दिखा रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस ‘बहिष्कार’ का क्या नतीजा निकलता है और क्या देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही आवाज़ उठने वाली है।



